सरिस्का सीटीएच के नए ड्राफ्ट का विरोध, धीरोड़ा–गोलाकाबास क्षेत्र की ग्राम सभाओं में ग्रामीणों ने जताई आपत्ति..
ग्राम सभा में स्थानीय निवासी रामदयाल गुर्जर ने आरोप लगाया कि नए प्रस्तावित ड्राफ्ट में मल्लाना, तिलवाड़ी, खोह दरीबा, बलदेवगढ़ सहित मार्बल खनिज खनन क्षेत्रों को शामिल नहीं किया गया है, जबकि इसके विपरीत गोलाकाबास के राजस्व ग्राम भानगढ़ तथा ग्राम पंचायत धीरोड़ा क्षेत्र को सीटीएच में शामिल कर लिया गया है। इसी के विरोध में गोलाकाबास, धीरोड़ा और पावटा ग्राम पंचायतों की ग्राम सभाओं में सीटीएच में शामिल नहीं किए जाने को लेकर आपत्तियां दर्ज करवाई गई हैं।
स्थानीय निवासी रमेश ने बताया कि ग्राम पंचायत गोलाकाबास, धीरोड़ा एवं बलदेवगढ़ की ग्राम सभाओं में सैकड़ों ग्रामीण और स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। राजस्व ग्राम भानगढ़ के वन क्षेत्र को सीटीएच में शामिल किए जाने पर ग्रामीणों ने मौखिक एवं लिखित आपत्ति पत्र सौंपे। उन्होंने बताया कि भानगढ़ एक प्राचीन ऐतिहासिक स्थल है, जिसे देश-विदेश में भूतिया शहर और खंडहर भानगढ़ के नाम से जाना जाता है, जहां बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। इसके अलावा भानगढ़ क्षेत्र में कई धार्मिक स्थल भी स्थित हैं, जहां स्थानीय ग्रामीणों के साथ-साथ दौसा और जयपुर जिलों के दूर-दराज गांवों से श्रद्धालु प्रत्येक वार को प्रसाद चढ़ाने, जात-जड़ूले, सवामणी, पदयात्रा आदि लेकर आते हैं। सरसा देवी मंदिर, नारायणी धाम सहित अनेक आस्था केंद्रों पर नियमित मानवीय गतिविधियां बनी रहती हैं, जिससे यह क्षेत्र बाघों के स्वतंत्र विचरण के लिए उपयुक्त नहीं है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि सीटीएच के नए ड्राफ्ट निर्धारण में बाघ परियोजना से सटे घने और सघन वन क्षेत्रों की अनदेखी कर 28 किलोमीटर दूर स्थित क्षेत्रों को शामिल किया गया है, जबकि उन समीपवर्ती क्षेत्रों में मार्बल खनिज खनन क्षेत्र आते हैं। ग्राम सभा के दौरान ग्रामीणों ने ग्राम विकास अधिकारी को व्यक्तिगत खातेदारी कृषि भूमि और सामूहिक चरागाह भूमि को लेकर आपत्ति के प्रार्थना पत्र भी सौंपे।
ग्राम सभा में उपस्थित सैकड़ों ग्रामीणों ने सीटीएच लागू होने से पशुधन और कृषि व्यवसाय को होने वाले नुकसान, वन क्षेत्र के समीप बसी छितराई हुई ढाणियों, वन क्षेत्र से होकर गुजरने वाले प्रमुख आवागमन मार्गों के प्रतिबंधित होने से होने वाली समस्याओं सहित अन्य सभी बिंदुओं पर सुझाव और आपत्तियां दर्ज करवाईं। साथ ही निजी कृषि भूमि के खातेदारों ने भी अलग-अलग आपत्तियां प्रस्तुत कीं।