यूक्रेन में बढ़त के बाद पुतिन के तेवर सख्त, बोले— ‘लक्ष्य हासिल करके ही रहेंगे’, यूरोप को खुली चेतावनी….
25 साल की सत्ता में निर्णायक मोड़ पर पुतिन
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस शुक्रवार को अपनी सत्ता के 25वें वर्ष में पारंपरिक वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस करने जा रहे हैं। यूक्रेन युद्ध में हालिया सैन्य बढ़त और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच यह संबोधन सिर्फ सवाल-जवाब नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए रूस की रणनीतिक दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।
यूक्रेन मोर्चे पर बढ़त, आत्मविश्वास चरम पर
जैसे-जैसे युद्ध एक और कड़ाके की सर्दी में प्रवेश कर रहा है, पुतिन का आत्मविश्वास साफ नजर आ रहा है। रूस को पूर्वी यूक्रेन में मिली हालिया सफलता के बाद क्रेमलिन का रुख और कठोर हो गया है। पुतिन ने संकेत दिए हैं कि रूस किसी भी कीमत पर अपने घोषित सैन्य लक्ष्यों से पीछे हटने वाला नहीं है।
‘बातचीत नहीं तो ताकत’, यूरोप को सीधी धमकी
पुतिन ने हाल ही में यूरोपीय संघ के नेताओं पर तीखा हमला करते हुए कहा कि अगर कूटनीतिक रास्ता नाकाम हुआ, तो रूस सैन्य बल के जरिए अपने उद्देश्य पूरे करेगा। उन्होंने रक्षा अधिकारियों से दो टूक शब्दों में कहा,
“स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशन के लक्ष्य हर हाल में हासिल किए जाएंगे।”
यह बयान यूरोप के लिए सीधी चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है।
रूस-यूक्रेन युद्ध: चार साल, अनगिनत जख्म
फरवरी 2022 में शुरू हुआ यह युद्ध द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोप का सबसे बड़ा सैन्य संघर्ष बन चुका है। हजारों लोगों की मौत, लाखों का विस्थापन और रूस पर अभूतपूर्व प्रतिबंध—इस युद्ध ने वैश्विक राजनीति को झकझोर कर रख दिया है। साथ ही रूस के भीतर अभिव्यक्ति की आजादी पर भी सोवियत दौर जैसी सख्ती लौट आई है।
ट्रम्प फैक्टर से यूरोप में बेचैनी
यह प्रेस कॉन्फ्रेंस ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से शांति समझौते का दबाव बढ़ रहा है। यूरोपीय देशों को आशंका है कि ट्रम्प यूक्रेन पर समझौते के लिए दबाव बना सकते हैं। दूसरी ओर, रूस खुद को इस समय मजबूत स्थिति में मान रहा है और युद्धविराम से पहले स्थायी और अनुकूल समझौता चाहता है।
आम रूसियों की सोच: शांति चाहिए, हार नहीं
मॉस्को की सड़कों पर जनता की भावना मिश्रित दिखाई देती है। लोग युद्ध खत्म होना चाहते हैं, लेकिन पीछे हटने की कीमत पर नहीं।
55 वर्षीय अकाउंटेंट लिली रेशेतन्याक कहती हैं, “मेरे अपने लोग डोनबास में लड़ रहे हैं, मैं नहीं चाहती कि रूस वहां से पीछे हटे।”
वहीं 65 वर्षीय अन्ना का कहना है, “हम शांति चाहते हैं, लेकिन पुतिन के साथ खड़े हैं।”
युद्ध की असली कीमत: महंगाई और दमन
चार साल के युद्ध ने रूसी अर्थव्यवस्था को पूरी तरह ‘वॉर मोड’ में डाल दिया है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का असर आम लोगों की जिंदगी पर साफ दिख रहा है। बड़े शहरों में चमक-दमक है, लेकिन छोटे कस्बों में हालात बिगड़ते जा रहे हैं।
युद्ध की आलोचना करना अपराध बन चुका है—हजारों लोग जेल में हैं, निर्वासन में हैं या राजनीतिक तौर पर खामोश कर दिए गए हैं।
शुक्रवार को होने वाले लाइव टीवी कार्यक्रम में रूस के 12 टाइम ज़ोन से सवाल पूछे जाएंगे। पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या पुतिन शांति की कोई ठोस पहल करेंगे, या फिर यूक्रेन युद्ध को निर्णायक सैन्य जीत तक ले जाने का संकल्प और मजबूत करेंगे।
शांति की खिड़की या टकराव का नया अध्याय?
यूक्रेन में बढ़त ने पुतिन की स्थिति मजबूत की है, लेकिन इससे युद्ध के और लंबा खिंचने का खतरा भी बढ़ गया है। यूरोप, अमेरिका और यूक्रेन—तीनों के लिए आने वाले महीने निर्णायक साबित हो सकते हैं।
अब असली सवाल यही है:
क्या पुतिन ताकत के दम पर शांति थोपना चाहते हैं, या बातचीत की कोई वास्तविक गुंजाइश अब भी बची है?