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Rupee All Time Low: डॉलर के मुकाबले फिर फिसला रुपया, 90.82 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा

नई दिल्ली

भारतीय रुपये पर गिरावट का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.82 प्रति डॉलर तक कमजोर हो गया, जो अब तक का सर्वकालिक न्यूनतम स्तर है। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने रुपये को और नीचे धकेल दिया।


Record Break Fall: एक दिन में टूटा पुराना रिकॉर्ड

मंगलवार को रुपया 90.8275 प्रति डॉलर तक गिर गया, जिससे उसने सोमवार को बना पिछला रिकॉर्ड 90.7875 भी पार कर लिया। इससे पहले 12 दिसंबर को रुपया पहली बार 90.55 के स्तर तक फिसला था। बीते शुक्रवार से अब तक रुपये में कुल 27 पैसे की गिरावट दर्ज की जा चुकी है।


Yearly Performance: 2025 में 6% तक टूट चुका है रुपया

साल 2025 में अब तक भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले लगभग 6% कमजोर हो चुका है। इस गिरावट के साथ रुपया उभरते बाजारों की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में शामिल हो गया है, जिससे आयात महंगा और महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका बनी हुई है।


Why Rupee Is Falling: गिरावट की बड़ी वजहें क्या हैं

विशेषज्ञों के मुताबिक रुपये की कमजोरी के पीछे कई अहम कारण हैं—

  • भारतीय निर्यात पर लगे कड़े अमेरिकी टैरिफ
  • भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर अनिश्चितता
  • विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार बिकवाली

2025 में अब तक विदेशी निवेशकों ने 18 अरब डॉलर से अधिक के भारतीय शेयर बेच दिए हैं, जिससे रुपये पर दबाव और बढ़ा है।


Stock Market Impact: सेंसेक्स और निफ्टी भी फिसले

रुपये की कमजोरी का असर शेयर बाजार पर भी दिखा। शुरुआती कारोबार में—

  • बीएसई सेंसेक्स करीब 0.4% गिरा
  • निफ्टी 50 भी लगभग 0.4% कमजोर रहा

इससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई है।


RBI Intervention: डॉलर बिक्री से गिरावट पर लगी आंशिक रोक

ट्रेडर्स के अनुसार, नॉन-डिलीवरी फॉरवर्ड (NDF) मार्केट में पोजीशन की परिपक्वता ने रुपये पर दबाव डाला। हालांकि, सरकारी बैंकों द्वारा डॉलर की बिक्री, जो संभवतः RBI के इशारे पर की गई, ने गिरावट को पूरी तरह बेकाबू होने से रोका।


Expert View: फंडामेंटल नहीं, शॉर्ट टर्म फैक्टर जिम्मेदार

विश्लेषकों का कहना है कि रुपये की कमजोरी आर्थिक बुनियाद की बजाय अल्पकालिक कारणों से हो रही है।
उनके अनुसार—

  • ₹90.00–₹90.20 का स्तर मजबूत सपोर्ट जोन
  • ₹90.80–₹91.00 रुपये के लिए बड़ा रेजिस्टेंस जोन

जब तक टैरिफ और विदेशी निवेश से जुड़ी चिंताएं बनी रहेंगी, दबाव जारी रह सकता है।


When Will Rupee Recover: कब सुधरेगी स्थिति

विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये में मजबूती तब ही आएगी जब भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में कोई ठोस प्रगति होगी। ट्रेड सचिव ने भी संकेत दिया है कि बातचीत जारी है और अगले कुछ महीनों में स्थिति साफ हो सकती है।


Positive Signs: निर्यात में तेजी से राहत की उम्मीद

हालांकि कुछ सकारात्मक संकेत भी सामने आए हैं।

  • नवंबर में अमेरिका को भारत का निर्यात 21% बढ़ा
  • भारत का व्यापार घाटा घटकर $24.53 बिलियन पर पहुंचा, जो पांच महीने का निचला स्तर है

इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि मजबूत आर्थिक वृद्धि और निर्यात, अमेरिकी टैरिफ के असर को कुछ हद तक संतुलित कर सकते हैं।


Analysis: रुपये की गिरावट क्यों है अहम

  • आयात महंगा होने से महंगाई का खतरा
  • विदेशी निवेशकों का भरोसा कमजोर
  • शेयर बाजार पर दबाव
  • RBI के लिए नीति संतुलन चुनौती
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