जयपुर में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का चार दिवसीय प्रवास शुरू, संगठन के कार्यों की करेंगे समीक्षा…
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत चार दिवसीय प्रवास पर जयपुर पहुंचे हैं। इस दौरान वे संगठन के प्रांतीय और क्षेत्रीय अधिकारियों के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकों में भाग लेंगे। उनके इस दौरे को संघ के भावी कार्यक्रमों की रूपरेखा तय करने और संगठनात्मक मजबूती की दृष्टि से अहम माना जा रहा है।
संघ प्रमुख का स्वागत, कार्यकर्ताओं में उत्साह
भागवत के जयपुर पहुंचते ही संघ कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। शहर के कई हिस्सों में स्वागत बैनर और पोस्टर लगाए गए हैं। संघ के सूत्रों के अनुसार, इस प्रवास के दौरान वे प्रांत स्तरीय अधिकारियों, प्रचारकों और क्षेत्रीय प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे।
आंतरिक समीक्षा बैठकों का रहेगा फोकस
मोहन भागवत अपने प्रवास के दौरान संघ की संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा करेंगे। बताया जा रहा है कि आगामी वर्ष के कार्यक्रमों की रूपरेखा, शाखाओं की सक्रियता और सामाजिक परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर चर्चा की जाएगी। संघ के अनुसार, यह दौरा ‘कार्य की गुणवत्ता और प्रसार’ पर केंद्रित रहेगा।
सामाजिक समरसता और राष्ट्रनिर्माण पर चर्चा
भागवत जयपुर में कुछ प्रमुख शिक्षाविदों, धर्मगुरुओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं से भी संवाद करेंगे। इस दौरान सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और ग्राम विकास जैसे विषयों पर विचार-विमर्श की संभावना है। संघ का मानना है कि समाज में जागरूकता के साथ-साथ एकता को मजबूत करना आज की जरूरत है।
राजनीतिक हलकों में भी बढ़ी चर्चा
संघ प्रमुख के जयपुर प्रवास को राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। विधानसभा चुनाव के बाद राज्य की बदलती परिस्थितियों में उनकी मौजूदगी को संघ की रणनीतिक बैठक के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि संघ ने इसे “नियमित संगठनात्मक प्रवास” बताया है।
संघ की गतिविधियों में नई ऊर्जा की उम्मीद
चार दिनों तक चलने वाले इस प्रवास के दौरान भागवत जयपुर प्रांत के विभिन्न जिलों के स्वयंसेवकों से भी मिलेंगे। संघ पदाधिकारियों का कहना है कि उनके मार्गदर्शन से संगठनात्मक कार्यों में नई दिशा और ऊर्जा का संचार होगा।
मोहन भागवत का यह प्रवास केवल औपचारिक नहीं, बल्कि संगठनात्मक मजबूती और सामाजिक सरोकारों पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। जयपुर में उनकी मौजूदगी से संघ कार्यकर्ताओं में नई प्रेरणा और दिशा तय होने की उम्मीद जताई जा रही है।