‘हिंदू’ शब्द विदेशी, संघ कोई राजनीतिक दल नहीं: RSS प्रमुख मोहन भागवत का स्पष्ट संदेश…
RSS के 100 वर्ष पूरे होने पर मुंबई में ऐतिहासिक आयोजन: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर शनिवार को मुंबई के वर्ली स्थित नेहरू सेंटर में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने संगठन की प्रकृति, विचारधारा और समाज में उसकी भूमिका को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कहीं।
रामायण-महाभारत में ‘हिंदू’ शब्द नहीं, यह विदेशी उत्पत्ति का है
अपने संबोधन में मोहन भागवत ने ‘हिंदू’ शब्द को लेकर चल रही बहस पर स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि यह शब्द भारतीय मूल का नहीं, बल्कि विदेशी है। उन्होंने कहा कि रामायण और महाभारत जैसे प्राचीन भारतीय ग्रंथों में कहीं भी ‘हिंदू’ शब्द का उल्लेख नहीं मिलता। भागवत के अनुसार, यह शब्द ऐतिहासिक परिस्थितियों के चलते प्रचलन में आया, लेकिन भारतीय परंपरा और संस्कृति की आत्मा इससे कहीं व्यापक है।
RSS कोई राजनीतिक पार्टी नहीं: भागवत
संघ को लेकर अक्सर लगाए जाने वाले राजनीतिक आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए RSS प्रमुख ने साफ कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कोई राजनीतिक दल नहीं है। उन्होंने बताया कि संघ से जुड़े कई स्वयंसेवक समाज, शिक्षा, सेवा और राजनीति सहित विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय हैं, लेकिन संघ स्वयं किसी राजनीतिक गतिविधि में भाग नहीं लेता।
भारतीय होना केवल नागरिकता नहीं, बल्कि संस्कार है
मोहन भागवत ने भारतीय होने की परिभाषा को विस्तार से समझाते हुए कहा कि भारतीयता केवल नागरिकता तक सीमित नहीं है। यह एक विशेष स्वभाव, सोच और संस्कार को दर्शाती है, जो समाज को जोड़ने का काम करता है। उन्होंने कहा कि यह जोड़ने वाला स्वभाव अनुशासन, सेवा और समर्पण के माध्यम से और अधिक सशक्त बनता है।
संघ की तुलना किसी और संगठन से नहीं की जा सकती
संघ की विशिष्टता को समझाते हुए भागवत ने कहा कि आमतौर पर लोग किसी संस्था को समझने के लिए उसकी तुलना अन्य संगठनों से करते हैं, लेकिन संघ के मामले में यह तरीका सही नहीं है। उन्होंने कहा कि संघ का कोई “कंपेरेबल” विकल्प नहीं है और इसे किसी पार्टी या सामान्य संगठन की श्रेणी में रखकर नहीं देखा जाना चाहिए।
संघ को समझने के लिए नजदीक से जानना जरूरी
संघ को लेकर बनी धारणाओं पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि लोग अक्सर दूर से या सतही जानकारी के आधार पर राय बना लेते हैं। केवल कार्यक्रमों या बाहरी गतिविधियों को देखकर संघ को समझना अधूरा दृष्टिकोण है। यदि संघ को उसके कार्यकर्ताओं के साथ बैठकर और उसके विचारों को गहराई से समझा जाए, तो यह भ्रम स्वतः दूर हो जाएगा कि संघ किसी राजनीतिक दल की तरह काम करता है।
समाज और चरित्र निर्माण है संघ का मूल उद्देश्य
मोहन भागवत ने दोहराया कि RSS का मुख्य उद्देश्य समाज निर्माण, चरित्र निर्माण और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करना है। संघ सभी धर्मों के प्रति सम्मान और समभाव की भावना के साथ कार्य करता है और समाज को एक सूत्र में बांधने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है।