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RPSC महा-घोटाला: RAS 2018-2021 में कथित फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा, किरोड़ी लाल मीणा ने CM को लिखा पत्र….

राजस्थान की सियासत में नया भूचाल आ गया है। पेपर लीक और भर्ती घोटालों से घिरी RPSC पर अब अंदरूनी आरोपों की बौछार शुरू हो गई है। जेल में बंद पूर्व सदस्य के खुलासों के बाद कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर बड़े चेहरों तक पहुंचने की मांग की है।


जेल में हुई मुलाकात के बाद खुलासों का दावा

राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक मामले में जेल में बंद बाबूलाल कटारा से 7 जनवरी 2026 को मंत्री किरोड़ी लाल मीणा की मुलाकात हुई। मंत्री का दावा है कि इस बातचीत में आयोग के भीतर हुए कथित फर्जीवाड़े से जुड़े कई नाम और तथ्य सामने आए।

10 फरवरी को मुख्यमंत्री को भेजे गए विस्तृत पत्र में मंत्री ने कटारा को ‘सरकारी गवाह’ बनाने की मांग की है, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके।


RAS 2018 और 2021 भर्ती पर गंभीर आरोप

पत्र में आरोप लगाया गया है कि RAS 2018 की मुख्य परीक्षा में उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग का काम ऐसी निजी फर्म को सौंपा गया, जो कथित तौर पर तत्कालीन अधिकारियों से जुड़ी हुई थी।

वहीं RAS 2021 मुख्य परीक्षा में पूर्व अध्यक्ष संजय श्रोत्रिय पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी शिक्षकों के बजाय निजी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के शिक्षकों से कॉपियां जांचवाईं। आरोप है कि इससे कुछ अभ्यर्थियों को मनमाने अंक देने की आशंका पैदा हुई।


शिव सिंह राठौड़ पर भी उठे सवाल

पूर्व कार्यवाहक अध्यक्ष शिव सिंह राठौड़ पर आरोप है कि मुख्य परीक्षा के 10 अंकों का एक प्रश्न सोशल मीडिया पर पहले ही सार्वजनिक कर दिया गया था। यह भी दावा किया गया है कि प्रारंभिक परीक्षा निरस्त करने के आदेश के बावजूद मुख्य परीक्षा जल्दबाजी में कराई गई।

हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच जारी है।


SOG की भूमिका पर भी सवाल

मंत्री मीणा ने जांच एजेंसी SOG के कुछ अधिकारियों पर भी आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कुछ अधिकारियों ने अपने करीबियों को पेपर पढ़वाए। मोहन पोषवाल को कथित रूप से इस पूरे मामले का मुख्य सरगना बताया गया है। मंत्री का दावा है कि वे इससे जुड़े साक्ष्य पहले ही एसओजी को सौंप चुके हैं।


‘सरकारी गवाह’ बनाने की मांग

डॉ. किरोड़ी लाल मीणा का कहना है कि बाबूलाल कटारा इस कथित घोटाले का केवल एक हिस्सा हैं, जबकि असली मास्टरमाइंड अभी सामने नहीं आए हैं। उनका मानना है कि यदि कटारा को सरकारी गवाह बनाया जाता है तो अदालत में बड़े नेताओं और नौकरशाहों के नाम उजागर हो सकते हैं।

इस पूरे घटनाक्रम ने राजस्थान की राजनीति और प्रशासनिक तंत्र में हलचल मचा दी है। फिलहाल सरकार और जांच एजेंसियों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह प्रदेश की सबसे बड़ी भर्ती परीक्षाओं में से एक पर गहरा असर डाल सकता है और लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़े सवाल खड़े कर सकता है।

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