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गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर चमकेगी राजस्थान की झांकी, उस्ता कला बनेगी आकर्षण का केंद्र


गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर दिल्ली के कर्तव्य पथ पर राजस्थान की सांस्कृतिक भव्यता एक बार फिर देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत होगी। “राजस्थान: मरुस्थल का स्वर्ण स्पर्श” थीम पर आधारित राजस्थान की झांकी ने दिल्ली कैंट स्थित आर.आर. कैम्प रंगशाला में आयोजित प्रेस प्रिव्यू के दौरान सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। इस झांकी में बीकानेर की विश्वविख्यात उस्ता कला को केंद्र में रखा गया है, जो राजस्थान की शाही विरासत और पारंपरिक शिल्पकला का प्रतीक है।


🎨 झांकी में क्या होगा खास

राजस्थान की झांकी को पारंपरिक कला, लोक संस्कृति और मरुस्थलीय जीवन के सजीव चित्रण के रूप में तैयार किया गया है।

  • अग्र भाग में राजस्थान के प्रसिद्ध लोक वाद्य रावणहट्टा का वादन करते कलाकार की 180 डिग्री घूमती प्रतिमा प्रदर्शित की गई है।
  • दोनों ओर उस्ता कला से सजी सुराही, कुप्पी और दीपक आकर्षक फ्रेमों में लगाए गए हैं।
  • झांकी की ऊँचाई लगभग 13 फीट है, जो इसे दूर से ही भव्य रूप देती है।

🐪 ट्रेलर और पृष्ठभाग में दिखेगी मरुस्थलीय संस्कृति

झांकी के ट्रेलर भाग में—

  • उस्ता कला से सजी घूमती हुई पारंपरिक कुप्पी
  • हस्तशिल्प पर कार्य करते कारीगरों के जीवंत दृश्य

दिखाए गए हैं।
पृष्ठभाग में विशाल ऊँट और ऊँट सवार की प्रतिमा राजस्थान के मरुस्थलीय जीवन और लोक परंपरा का सशक्त प्रतीक है। दोनों ओर उस्ता कला से अलंकृत मेहराबों में स्वर्ण पत्तेदार कारीगरी के उत्कृष्ट नमूने प्रदर्शित किए गए हैं।


💃 गेर नृत्य से सजी लोक संस्कृति

झांकी के चारों ओर गेर लोक नृत्य प्रस्तुत करते कलाकार राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान को और अधिक प्रभावशाली बनाते हैं। यह झांकी लोक कला, शाही विरासत और पारंपरिक जीवनशैली का सजीव संगम बनकर सामने आई है।


🗓️ 23 जनवरी को फुल ड्रेस रिहर्सल

झांकी के डिजाइनर एवं पर्यवेक्षक हर शिव कुमार शर्मा के अनुसार—

  • 23 जनवरी को फुल ड्रेस रिहर्सल होगी
  • 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मुख्य समारोह में यह झांकी कर्तव्य पथ पर प्रस्तुत की जाएगी

राजस्थान ललित कला अकादमी के सचिव डॉ. रजनीश हर्ष ने बताया कि झांकी का निर्माण राज्य की उप मुख्यमंत्री एवं पर्यटन, कला एवं संस्कृति मंत्री दिया कुमारी, अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रवीण गुप्ता और उप सचिव अनुराधा गोगिया के मार्गदर्शन में किया गया है।


🏺 क्या है उस्ता कला की खासियत

  • उस्ता कला ऊँट की खाल पर की जाने वाली स्वर्ण जड़ाई की पारंपरिक शाही कला है
  • इसकी उत्पत्ति ईरान में मानी जाती है
  • मुगल काल में इसका विकास हुआ और बीकानेर के महाराजा राय सिंह के समय यह राजस्थान पहुँची
  • इसमें 24 कैरेट स्वर्ण पत्रा और प्राकृतिक रंगों का उपयोग होता है
  • वर्तमान में इसका विस्तार लकड़ी, संगमरमर, कांच और दीवारों तक हो चुका है
  • बीकानेर की उस्ता कला को GI टैग भी प्राप्त है

कर्तव्य पथ पर प्रस्तुत होने वाली राजस्थान की झांकी न केवल राज्य की पारंपरिक कला और संस्कृति को दर्शाएगी, बल्कि बीकानेर की उस्ता कला को राष्ट्रीय मंच पर एक बार फिर पहचान दिलाएगी।

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