कानपुर में घरों के बाहर टंगी लाल बोतलें, आवारा कुत्तों से बचाव का अनोखा तरीका बना चर्चा का विषय…..
कानपुर।
उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में इन दिनों एक अजीब लेकिन चर्चित नज़ारा देखने को मिल रहा है। शहर के कुछ इलाकों में लोग अपने घरों के बाहर लाल रंग से भरी प्लास्टिक बोतलें टांग रहे हैं। यह दृश्य अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसके पीछे की वजह जानने को उत्सुक हैं।
🐕 आवारा कुत्तों से बचाव के लिए अपनाया जा रहा उपाय
स्थानीय निवासियों के अनुसार, यह तरीका आवारा कुत्तों को घरों के आसपास आने और गंदगी फैलाने से रोकने के लिए अपनाया गया है। लोगों का मानना है कि लाल रंग की बोतलें देखकर कुत्ते उस जगह से दूरी बना लेते हैं।
🤔 अंधविश्वास या लोक अनुभव?
कुछ लोग इसे पुराने समय से चला आ रहा लोक उपाय बताते हैं, जबकि कई लोग इसे पूरी तरह अंधविश्वास मान रहे हैं। हालांकि अब तक इस बात का कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण सामने नहीं आया है कि लाल बोतलें वास्तव में कुत्तों को रोकती हैं।
🔬 वैज्ञानिक क्या कहते हैं?
विशेषज्ञों के मुताबिक कुत्तों की आंखों की संरचना इंसानों से अलग होती है और वे रंगों को उसी तरह नहीं देख पाते जैसे मनुष्य। ऐसे में लाल रंग से डरने या भ्रमित होने की थ्योरी को वैज्ञानिक रूप से सही नहीं ठहराया जा सकता।
📱 सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया
वायरल वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी बंटी हुई हैं। कुछ यूजर्स इसे जुगाड़ और देसी तरीका बता रहे हैं, तो कुछ इसे बेवजह फैलाया गया भ्रम कह रहे हैं। कई लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि नगर निगम और प्रशासन आवारा कुत्तों की समस्या पर स्थायी समाधान क्यों नहीं निकाल रहा।
📍 केवल कानपुर तक सीमित नहीं
जानकारों का कहना है कि इस तरह का प्रयोग सिर्फ कानपुर में ही नहीं, बल्कि देश के अन्य शहरों और कस्बों में भी देखने को मिला है, जहां लोग रंगीन बोतलें, शीशे या प्लास्टिक की वस्तुएं घरों के बाहर टांगते हैं।
❗ प्रशासन की चुप्पी
फिलहाल इस मामले पर नगर निगम या प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन वायरल हो रहे इस ट्रेंड ने एक बार फिर शहरों में आवारा पशुओं की समस्या को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।