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रामगढ़ में बंदरों का कहर: सैकड़ों लोग घायल, आक्रोशित नागरिकों ने नगरपालिका घेरी, 4 दिन में समाधान नहीं तो बाजार बंद का ऐलान…

🔹 कस्बे में भय का माहौल, घर से निकलना मुश्किल

अलवर जिले के रामगढ़ कस्बे में इन दिनों बंदरों का आतंक चरम पर है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि आम लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। गलियों, बाजारों और घरों की छतों पर घूमती बंदरों की टोलियां राह चलते लोगों पर हमला कर रही हैं।

🔹 सैकड़ों लोग घायल, गंभीर मामले आए सामने

अब तक सैकड़ों लोग बंदरों के हमलों में घायल हो चुके हैं। दिनेश चौहान, शांति शर्मा और प्रभुदयाल मेघवाल पर हुए हमलों ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। दिनेश चौहान को गंभीर हालत में जयपुर ले जाकर कान की सर्जरी करानी पड़ी।

🔹 स्कूली बच्चों तक पर हमला, अभिभावकों में आक्रोश

बंदरों के हमले केवल राहगीरों तक सीमित नहीं रहे। एक निजी विद्यालय के छात्र पर बंदरों की टोली द्वारा हमला किए जाने की घटना के बाद अभिभावकों में भी भारी रोष व्याप्त है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर लोग बेहद चिंतित हैं।

🔹 नगरपालिका कार्यालय का घेराव, जमकर प्रदर्शन

नगरपालिका की निष्क्रियता से नाराज सैकड़ों नागरिकों ने बुधवार को नगरपालिका कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कई बार शिकायतें और ज्ञापन देने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

🔹 प्रशासन को पहले भी दी गई थी चेतावनी

समाजसेवी जयराम मीणा ने बताया कि इससे पहले जिला कलेक्टर को भी बंदरों की समस्या को लेकर ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं हुआ। लोगों का कहना है कि प्रशासन केवल आश्वासन देकर मामले को टाल रहा है।

🔹 4 दिन की चेतावनी, नहीं हुआ समाधान तो बाजार बंद

प्रदर्शन के दौरान नगरपालिका कर्मचारियों ने दो दिन का समय मांगा, लेकिन आक्रोशित नागरिकों ने स्पष्ट कर दिया कि यदि चार दिन के भीतर बंदर पकड़ने वाली टीम नहीं बुलाई गई तो पूरा कस्बा बाजार बंद कर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

🔹 पूर्व सरपंच ने लगाए भ्रष्टाचार के आरोप

पूर्व सरपंच महेंद्र कृष्णन ने नगरपालिका पर गंभीर भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि वर्षों से बंदरों की समस्या बनी हुई है, लोग रोज घायल हो रहे हैं, लेकिन नगरपालिका मूकदर्शक बनी है।

🔹 बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद

प्रदर्शन में तरुण शर्मा, राकेश सतीजा, जवाहर तनेजा, लोकेश कुकरेजा, तुलसी सैनी, अजीत जैन, अनिल जैन, सचिन मनचंदा, अविनाश यादव, मुकेश यादव, रिंकू सैनी, किशन सतीजा सहित बड़ी संख्या में कस्बेवासी मौजूद रहे।

🔹 विश्लेषण: प्रशासन के लिए चेतावनी की घंटी

रामगढ़ में बंदरों का बढ़ता आतंक अब केवल प्रशासनिक समस्या नहीं, बल्कि जन सुरक्षा का गंभीर मुद्दा बन चुका है। यदि तय समय में समाधान नहीं हुआ तो यह आंदोलन बड़े स्तर पर फैल सकता है, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति भी प्रभावित हो सकती है।

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