राजगीर सामूहिक आत्महत्या कांड का खुलासा: हत्या के अपराधबोध और मोक्ष की चाह में पूरे परिवार ने दी जान…..
बिहार के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल राजगीर में दिगंबर जैन धर्मशाला से मिले चार शवों के मामले का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। जांच में सामने आया है कि यह कोई हत्या या लूट की वारदात नहीं, बल्कि गहरे अपराधबोध और मोक्ष की कामना में किया गया सामूहिक आत्महत्या का मामला है।
कमरा नंबर 6AB में मिला दिल दहला देने वाला दृश्य
6 फरवरी की सुबह धर्मशाला के कमरा नंबर 6AB से तेज बदबू आने पर स्टाफ ने पुलिस को सूचना दी। जब पुलिस ने दरवाजा तोड़ा, तो कमरे के चारों कोनों में चार शव फंदे से लटके मिले। सभी शव सड़ी-गली अवस्था में थे, जिससे अनुमान लगाया गया कि मौत कई दिन पहले हो चुकी थी।
मृतकों की पहचान: बेंगलुरु का पूरा परिवार
मृतकों की पहचान बेंगलुरु के नागासंद्रा निवासी 30 वर्षीय जीआर नागा प्रसाद, उनकी दिव्यांग मां जीआर सुमंगला और दो बहनों शिल्पा व श्रुता के रूप में हुई। चारों एक साथ तीर्थ यात्रा पर निकले थे और राजगीर में धर्मशाला में ठहरे थे।
भांजे की हत्या से शुरू हुई त्रासदी
पुलिस जांच में सामने आया कि नागा प्रसाद ने जुलाई 2025 में अपने 14 वर्षीय भांजे ओमकृति की हत्या कर दी थी। ओमकृति ऑनलाइन गेमिंग और जुए का आदी था और आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार का पैसा लगातार बर्बाद कर रहा था। गुस्से में आकर नागा ने यह कदम उठाया, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
जेल से जमानत, लेकिन अपराधबोध से नहीं मिली मुक्ति
करीब पांच महीने जेल में रहने के बाद 17 दिसंबर को नागा प्रसाद को जमानत मिली। जेल से बाहर आने के बाद पूरा परिवार गहरे मानसिक तनाव और सामाजिक भय में जी रहा था। परिवार का मानना था कि भांजे की हत्या एक अक्षम्य पाप है, जिसका प्रायश्चित केवल मोक्ष की प्राप्ति से ही संभव है।
तीर्थ यात्रा के नाम पर निकले मोक्ष की तलाश में
परिजनों के अनुसार, पूरे परिवार ने पाप से मुक्ति के लिए तीर्थ यात्रा का निर्णय लिया। नेपाल की यात्रा के बाद 31 जनवरी को वे राजगीर पहुंचे। 1 फरवरी को उन्हें आखिरी बार धर्मशाला के स्टाफ ने देखा था, इसके बाद कमरे में कोई हलचल नहीं हुई।
लूट या साजिश की आशंका खारिज
पुलिस को कमरे से 1.18 लाख रुपये नकद और गहने मिले हैं। सभी सामान सुरक्षित मिलने के कारण लूट या बाहरी साजिश की संभावना को खारिज कर दिया गया है। प्रारंभिक जांच में मामला सामूहिक आत्महत्या की ओर इशारा करता है।
नालंदा एसपी भरत सोनी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 8 सदस्यीय SIT का गठन किया है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं नागा प्रसाद ने पहले अपनी मां और बहनों की हत्या तो नहीं की। सबूत जुटाने के लिए पुलिस की एक टीम बेंगलुरु भी भेजी गई है।
अंतिम संस्कार पटना में, परिवार का कोई सदस्य जीवित नहीं
शनिवार को बेंगलुरु से आए दूर के रिश्तेदारों ने पटना के PMCH में शवों की पहचान की। परिवार में कोई भी जीवित सदस्य न होने के कारण पोस्टमार्टम के बाद शव पड़ोसियों और रिश्तेदारों को सौंपे गए। चारों का अंतिम संस्कार शनिवार देर रात पटना में किया गया।