राजगढ़ में केंद्रीय विद्यालय को बाहर शिफ्ट करने के फैसले पर उबाल, तीसरे दिन भी बाजार बंद, सड़कों पर उतरी जनता….
अलवर जिले के राजगढ़ कस्बे में स्वीकृत केंद्रीय विद्यालय को नगर सीमा से बाहर खोलने के फैसले के खिलाफ जनआक्रोश लगातार तेज होता जा रहा है। सोमवार को आंदोलन तीसरे दिन में प्रवेश कर गया, जहां पूरे कस्बे का बाजार पूरी तरह बंद रहा। आम जनजीवन ठप रहा और हजारों लोगों ने महारैली निकालकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।
तीसरे दिन भी पूरा बाजार बंद, मेडिकल और सब्जी मंडी तक ठप
राजगढ़ आवाज मंच के आह्वान पर सोमवार को कस्बे का संपूर्ण बाजार शांतिपूर्ण तरीके से बंद रखा गया। खास बात यह रही कि मेडिकल स्टोर और सब्जी मंडी जैसी आवश्यक सेवाएं भी बंद रहीं। इससे साफ संदेश गया कि आंदोलन केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि जनता की सामूहिक भावना का परिणाम है। व्यापारियों, किसानों और आम नागरिकों ने स्वेच्छा से अपने प्रतिष्ठान बंद रखे।
महारैली में उमड़ा जनसैलाब, गूंजे नारे
सुबह करीब 9 बजे से ही व्यापारी, युवा, महिलाएं और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि पंडित भवानी सहाय चौक पर एकत्रित होने लगे। कुछ ही देर में हजारों की संख्या में लोग जमा हो गए। नारेबाजी के साथ शुरू हुई महारैली कस्बे के मुख्य मार्गों—गोल सर्किल, सराय बाजार होते हुए टहला बाईपास तक पहुंची। रैली के दौरान “केंद्रीय विद्यालय राजगढ़ में ही खोलो” जैसे नारों से पूरा कस्बा गूंज उठा।
आंदोलन मंच का बयान—यह अधिकारों की लड़ाई है
राजगढ़ आवाज मंच के प्रतिनिधि मुकेश जैमन ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि राजगढ़ के भविष्य और बच्चों के अधिकारों की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि राजगढ़ की जनता की आवाज अब जयपुर और राजस्थान सरकार तक पहुंच चुकी है और इसे तब तक शांत नहीं किया जाएगा, जब तक न्याय नहीं मिल जाता।
50 साल में पहली बड़ी योजना, उसे भी छीना जा रहा—आरोप
मंच से वक्ताओं ने आरोप लगाया कि पिछले करीब 50 वर्षों में राजगढ़ को कोई बड़ी शैक्षणिक या विकासात्मक योजना नहीं मिली। जब पहली बार केंद्रीय विद्यालय जैसी महत्वपूर्ण योजना स्वीकृत हुई, तो उसे कस्बे से दूर स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह फैसला स्थानीय जनता की भावनाओं के बिल्कुल विपरीत है।
जिला प्रशासन पर उदासीनता के आरोप
आंदोलन के दौरान जिला प्रशासन पर भी गंभीर आरोप लगाए गए। वक्ताओं ने कहा कि कई बार ज्ञापन सौंपने और बातचीत के बावजूद प्रशासन ने जनभावनाओं को नजरअंदाज किया। यदि समय रहते संवाद किया जाता, तो आंदोलन की नौबत नहीं आती। मंच ने प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की।
शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रखने का ऐलान
राजगढ़ आवाज मंच ने स्पष्ट किया कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और आगे भी रहेगा। साथ ही यह चेतावनी भी दी गई कि यदि मांगों पर ठोस निर्णय नहीं हुआ, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। मंच ने सभी वर्गों से एकजुट रहने और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखने की अपील की।
अब सरकार के फैसले पर टिकी नजर
तीन दिनों से जारी बंद और लगातार बढ़ते जनदबाव के बाद अब सभी की निगाहें राज्य सरकार और शिक्षा विभाग के अगले कदम पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि सरकार जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए निर्णय में बदलाव करती है या आंदोलन और तेज होता है।