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राजस्थान में योग्य साइंस टीचरों का संकट? RPSC की 350 भर्तियों में सैकड़ों पद खाली


राजस्थान में माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा सीनियर टीचर भर्ती परीक्षा-2024 के तहत विज्ञान विषय के लिए निकाली गई 350 भर्तियों में से बड़ी संख्या में पद खाली रह गए हैं। लाखों आवेदन आने के बावजूद योग्य अभ्यर्थियों की कमी ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


🟥 350 पदों के मुकाबले सिर्फ 296 अभ्यर्थी योग्य

RPSC की ओर से विज्ञान विषय में कुल 350 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके लिए 1 लाख 68 हजार 206 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया, लेकिन पात्रता जांच के बाद केवल 296 उम्मीदवारों को ही योग्य पाया गया। इसका सीधा मतलब है कि दर्जनों पद बिना चयन के ही खाली रह गए।


🟦 परीक्षा में शामिल हुए 1.17 लाख, पास सिर्फ 296

यह परीक्षा 9 सितंबर 2025 को प्रदेश के 25 जिला मुख्यालयों पर आयोजित की गई थी। परीक्षा में 1 लाख 17 हजार 364 अभ्यर्थी शामिल हुए, लेकिन परिणाम बेहद निराशाजनक रहा। कुल अभ्यर्थियों में से केवल 296 ही परीक्षा में सफल हो सके, जबकि बाकी न्यूनतम योग्यता भी हासिल नहीं कर पाए।


🟥 359 अभ्यर्थी सीधे अयोग्य घोषित

RPSC के अनुसार परीक्षा में गंभीर लापरवाही भी सामने आई। 359 उम्मीदवारों को इसलिए सीधे अयोग्य घोषित कर दिया गया क्योंकि उन्होंने 10 प्रतिशत से अधिक प्रश्नों में पांच विकल्पों में से कोई भी विकल्प नहीं भरा। आयोग का कहना है कि बड़ी संख्या में अभ्यर्थी न्यूनतम अंक (Minimum Marks) तक भी नहीं पहुंच पाए।


🟦 आरक्षित वर्गों से एक भी चयन नहीं

इस भर्ती की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कई आरक्षित श्रेणियों से एक भी अभ्यर्थी चयनित नहीं हो सका।
एसटी सामान्य, एसटी महिला, एसटी विधवा श्रेणी से कोई चयन नहीं हुआ। इसी तरह एससी महिला, विधवा, दिव्यांग और एक्स-सर्विसमैन कोटे से भी चयन सूची शून्य रही।


🟥 खाली पदों पर सरकार को भेजी जाएगी रिपोर्ट

ऐसी स्थिति में संभावना जताई जा रही है कि RPSC शेष रिक्त पदों को लेकर राज्य सरकार को विस्तृत रिपोर्ट भेजेगा। इन पदों को या तो भविष्य की भर्ती में जोड़ा जा सकता है या फिर विशेष नियमों के तहत दोबारा चयन प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।


🟦 शिक्षा विभाग में विज्ञान शिक्षकों की कमी बरकरार

भर्ती प्रक्रिया के इस परिणाम के बाद माध्यमिक शिक्षा विभाग में विज्ञान शिक्षकों की कमी बने रहने की आशंका है। इसका सीधा असर सरकारी स्कूलों में विज्ञान शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों के भविष्य पर पड़ सकता है।


लाखों आवेदनों के बावजूद योग्य अभ्यर्थियों का चयन न होना शिक्षा की गुणवत्ता, शिक्षक प्रशिक्षण और भर्ती मानकों पर बड़ा सवाल है। यह स्थिति बताती है कि सिर्फ भर्तियां निकालना पर्याप्त नहीं, बल्कि शिक्षक तैयार करने की पूरी प्रक्रिया पर पुनर्विचार की जरूरत है।

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