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स्टिंग से हिली राजस्थान की राजनीति विधायक निधि में 40% कमीशन के आरोप, सत्ता–विपक्ष आमने-सामने

राजस्थान की राजनीति में रविवार को ऐसा खुलासा हुआ, जिसने सत्ता और विपक्ष दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया। विधायक निधि से विकास कार्य स्वीकृत कराने के बदले कमीशन मांगने का स्टिंग सामने आते ही सरकार, संगठन और विधानसभा तीनों स्तरों पर हलचल तेज हो गई। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के त्वरित फैसलों ने इस मामले को केवल आरोपों तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि इसे जवाबदेही की बड़ी परीक्षा बना दिया है।

स्टिंग से मचा सियासी भूचाल

विधायक निधि में कथित कमीशनखोरी को लेकर सामने आए स्टिंगनुमा खुलासे ने राजस्थान की राजनीति में भूचाल ला दिया। आरोप है कि विकास कार्यों की अनुशंसा के बदले 40 प्रतिशत तक कमीशन की मांग की गई। मामला सार्वजनिक होते ही सरकार हरकत में आई और सख्त कदम उठाए गए।

सीएम का त्वरित एक्शन: तीन विधायकों के फंड फ्रीज

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बिना देरी किए तीन विधायकों के विधायक निधि खातों को तत्काल प्रभाव से फ्रीज करने के आदेश दिए। साथ ही पूरे मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित की गई, जिसे 15 दिन में रिपोर्ट सौंपनी होगी।

किन-किन विधायकों पर लगे आरोप

इस मामले में खींवसर से भाजपा विधायक रेवतराम डांगा, हिंडौन से कांग्रेस विधायक अनीता जाटव और बयाना से निर्दलीय विधायक डॉ. ऋतु बनावत का नाम सामने आया है। आरोप है कि विधायक निधि से स्कूलों में सामग्री सप्लाई जैसे कार्यों की अनुशंसा के बदले कमीशन की मांग की गई।

स्टिंग का दावा: “काम नहीं, सिर्फ कमीशन की बात”

स्टिंग में दावा किया गया कि डमी फर्म के जरिए विधायकों से संपर्क किया गया। काम की जरूरत या गुणवत्ता पर चर्चा के बजाय बातचीत केवल इस सवाल पर केंद्रित रही—“हमें कितना प्रतिशत मिलेगा?” कुछ मामलों में एडवांस राशि लेने और अनुशंसा पत्र जारी करने की भी बात सामने आई।

जांच समिति को 15 दिन का अल्टीमेटम

सीएम के निर्देश पर गठित समिति की अध्यक्षता ACS गृह भास्कर सावंत कर रहे हैं। समिति में पंचायतीराज और वित्त विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। जांच पूरी होने तक संबंधित फंड से किसी भी तरह का भुगतान नहीं होगा।

कांग्रेस में भी हलचल, आंतरिक जांच के संकेत

कांग्रेस विधायक का नाम सामने आते ही पार्टी स्तर पर भी हलचल तेज हो गई। प्रदेश प्रभारी ने प्रदेश अध्यक्ष से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी स्तर पर अलग से जांच समिति बन सकती है और दोष सिद्ध होने पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।

विधानसभा अध्यक्ष और विपक्ष की सख्त प्रतिक्रिया

विधानसभा अध्यक्ष ने मामले को सदाचार समिति को सौंप दिया है। वहीं नेता प्रतिपक्ष ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताते हुए निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है। सत्ता पक्ष के वरिष्ठ नेताओं ने भी त्वरित कार्रवाई को सही कदम बताया है।

विधायक निधि पर बड़ा सवाल

हर विधायक को सालाना 5 करोड़ रुपये की निधि जनकल्याण के लिए मिलती है। ऐसे में कमीशनखोरी के आरोप इस योजना की मंशा और व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े करते हैं।

आगे क्या?

विधायक निधि घोटाला अब सिर्फ आरोपों का मामला नहीं रहा। आने वाले 15 दिन तय करेंगे कि यह कार्रवाई सिर्फ सख्त संदेश बनकर रह जाती है या भ्रष्टाचार के खिलाफ राजस्थान की राजनीति में एक नई मिसाल कायम करती है।

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