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राजस्थान में पंचायत–निकाय चुनाव की तैयारी पूरी, अब तारीख तय करेगा आयोग राज्य सरकार ने जताई तत्परता, चुनावी सरगर्मियां जल्द तेज होने के संकेत

सरकार का दावा: चुनाव के लिए प्रशासनिक तैयारी पूरी

भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली राजस्थान सरकार ने कहा है कि पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव कराने के लिए प्रशासनिक स्तर पर सभी जरूरी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सरकार के अनुसार चुनाव प्रक्रिया शुरू करने के लिए आवश्यक औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं।

चुनाव की तारीख तय करना आयोग का अधिकार

कैबिनेट मंत्री जोगाराम पटेल ने जयपुर में मीडिया से बातचीत में बताया कि सरकार चुनाव कराने के पक्ष में है और किसी तरह की देरी नहीं चाहती। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव की तारीख तय करना राज्य निर्वाचन आयोग का संवैधानिक अधिकार है और सरकार आयोग को हर स्तर पर सहयोग देगी।

तीन स्तरीय पंचायत राज व्यवस्था का ढांचा

राजस्थान में पंचायत राज व्यवस्था ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद — इन तीन स्तरों पर काम करती है। ग्राम पंचायत का नेतृत्व सरपंच करता है, जिसे ग्रामीण मतदाता सीधे चुनते हैं। पंचायत चुनाव आमतौर पर पांच साल में एक बार कराए जाते हैं।

दो से अधिक संतान नियम में बदलाव की तैयारी

राज्य में पहले पंचायत चुनाव लड़ने के लिए दो से अधिक संतान वाले व्यक्ति को अयोग्य माना जाता था। अब सरकार इस नियम में बदलाव का प्रस्ताव आगे बढ़ा रही है। संशोधन लागू होने पर दो से अधिक संतान वाले भी पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव लड़ सकेंगे। इसके लिए संबंधित अधिनियम में संशोधन की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

सरपंच का मानदेय और भत्ते का प्रावधान

सरपंच को राज्य सरकार की ओर से मासिक मानदेय दिया जाता है। ग्राम पंचायत के आकार और श्रेणी के अनुसार यह राशि तय होती है। बैठकों और विशेष कार्यों के लिए अतिरिक्त भत्ते का भी प्रावधान है।

विकास कार्यों के लिए पंचायतों को मिलता है फंड

ग्राम पंचायतों को केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के तहत विकास कार्यों के लिए धनराशि मिलती है। इसमें सड़क, नाली, पेयजल, स्वच्छता, स्ट्रीट लाइट और सामुदायिक भवन जैसे कार्य शामिल हैं। 15वें वित्त आयोग, मनरेगा और राज्य योजनाओं के जरिए पंचायतों को आर्थिक सहायता दी जाती है।

सरपंच की जिम्मेदारियां और भूमिका

सरपंच ग्राम सभा की बैठक बुलाने, पंचायत प्रस्तावों को लागू कराने और विकास योजनाओं की निगरानी का जिम्मा निभाता है। पंचायत सचिव और कर्मचारियों के साथ मिलकर वह प्रशासनिक कार्यों का संचालन करता है।

गांव के विकास में ग्राम सभा की अहम भूमिका

साफ-सफाई, पेयजल, स्ट्रीट लाइट, आंगनबाड़ी और स्कूलों की देखरेख, पात्र लोगों को योजनाओं का लाभ दिलाना — ये सभी कार्य ग्राम सभा की सहमति और प्राथमिकता के आधार पर किए जाते हैं।

तारीख घोषित होते ही लागू होगी आचार संहिता

सरकार का कहना है कि जैसे ही राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव की तारीख घोषित करेगा, आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी। इसके बाद राजस्थान के ग्रामीण और शहरी इलाकों में चुनावी गतिविधियां तेज होने की पूरी संभावना है।

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