मेरिट में आने के बाद भी बाहर! भर्ती परीक्षा का मामला हाईकोर्ट पहुंचा, बोर्ड के तर्क पर उठे सवाल
राजस्थान में पशुधन सहायक भर्ती परीक्षा से जुड़ा एक अहम मामला अब हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। मेरिट हासिल करने के बावजूद कुछ अभ्यर्थियों के नाम अंतिम सूची से बाहर कर दिए गए, जिस पर राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने संज्ञान लेते हुए याचिकाकर्ताओं को बड़ी अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि अगली सुनवाई तक संबंधित पद सुरक्षित रखे जाएं।
⚖️ हाईकोर्ट ने दिया अंतरिम संरक्षण
राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ में न्यायमूर्ति अशोक कुमार जैन ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार, कर्मचारी चयन बोर्ड और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है।
कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक याचिकाकर्ता की श्रेणी में एक-एक पद अगली सुनवाई तक सुरक्षित रखा जाए, ताकि चयन प्रक्रिया से उनका अधिकार प्रभावित न हो।
📅 कब हुई थी भर्ती परीक्षा
- परीक्षा तिथि: 13 जून (पिछला वर्ष)
- कुल पद: 2783
- आवेदन करने वाले अभ्यर्थी: लगभग 37,000
- परिणाम जारी: दिसंबर में
परीक्षा के बाद याचिकाकर्ताओं ने मेरिट के आधार पर सफलता हासिल की थी, लेकिन दस्तावेज़ सत्यापन के बाद उनके नाम अस्थायी सूची में डाल दिए गए और अंतिम मेरिट से बाहर कर दिए गए।
🎓 डिप्लोमा को लेकर हुआ विवाद
याचिकाकर्ताओं ने राजस्थान विश्वविद्यालय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान, बीकानेर (RAJUVAS) से
डिप्लोमा इन एनिमल हसबेंड्री किया था।
कर्मचारी चयन बोर्ड का तर्क था कि जिस संस्थान से डिप्लोमा किया गया, उसके पास राज्य सरकार की NOC नहीं थी, इसलिए अभ्यर्थियों को मेरिट सूची में शामिल नहीं किया गया।
⚖️ याचिकाकर्ताओं की दलील
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता तनवीर अहमद ने कोर्ट में तर्क दिया कि—
- अभ्यर्थियों ने विश्वविद्यालय की आधिकारिक काउंसलिंग प्रक्रिया के जरिए प्रवेश लिया
- डिप्लोमा विधिवत रूप से पूरा किया गया
- संस्थान और सरकार के बीच प्रशासनिक विवाद का खामियाजा योग्य अभ्यर्थियों को नहीं भुगतना चाहिए
उन्होंने इसे अभ्यर्थियों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया।
⏳ 16 फरवरी को होगी अगली सुनवाई
कोर्ट ने
- दिनेश कुमार मीणा
- मनीषा
- सुनील पटेल
- नीरज कुमार मीणा
चारों याचिकाकर्ताओं के लिए उनकी आरक्षित श्रेणी में पद सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं।
मामले की अगली सुनवाई 16 फरवरी को होगी।
यह मामला राजस्थान की भर्ती प्रक्रियाओं में डिप्लोमा मान्यता और प्रशासनिक स्वीकृति जैसे अहम सवाल खड़े करता है। अगर कोर्ट याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला देता है, तो इसका असर अन्य समान मामलों पर भी पड़ सकता है।