राजस्थान बजट 2026: सरकार ने बताया ‘विकास का रोडमैप’, विपक्ष बोला—‘न विजन, न नीति, न नीयत’
सरकार का दावा: ‘सबका साथ, सबका विकास’ का बजट
प्रदेश की भाजपा सरकार का बजट आज विधानसभा में उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री दिया कुमारी ने पेश किया। सरकार ने इसे विकासोन्मुखी और जनकल्याणकारी बजट बताते हुए कहा कि यह प्रदेश को आत्मनिर्भर और विकसित राजस्थान की दिशा में आगे बढ़ाने वाला दस्तावेज है। बजट की प्रमुख घोषणाओं का सार इस प्रकार है—
जल जीवन मिशन पर जोर: ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल उपलब्धता बढ़ाने और नल कनेक्शन विस्तार की योजना।
बुनियादी ढांचे का विस्तार: सड़क, औद्योगिक क्षेत्रों और शहरी विकास परियोजनाओं को गति देने का दावा।
शिक्षा क्षेत्र में सुधार: स्कूलों के उन्नयन, नई योजनाओं और आधुनिक सुविधाओं की घोषणाएं।
वन एवं पर्यावरण पहल: ‘नमो वन’ और ‘नमो नर्सरी’ जैसी नई पहल का ऐलान।
दीर्घकालिक विजन 2047: सरकार ने प्रदेश को विकसित राज्य बनाने के लिए दीर्घकालिक लक्ष्य प्रस्तुत किए।
सरकार का कहना है कि यह बजट सामाजिक समावेशन, बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और आर्थिक मजबूती की दिशा में ठोस कदम है।
विपक्ष का हमला: ‘विश्वासघाती और खोखला बजट’
वहीं नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने बजट को ‘खोखला’, ‘सतही’ और प्रदेश की प्रगति को रोकने वाला करार दिया। उन्होंने कहा—
“न विजन, न नीति, न नीयत; भाजपा सरकार ने पेश किया विश्वासघाती बजट।”
अधूरी घोषणाओं पर सवाल
जूली ने दावा किया कि पिछले दो बजटों की 2718 घोषणाओं में से केवल 900 (करीब 30%) ही पूरी हुई हैं, जबकि 284 परियोजनाओं पर काम शुरू तक नहीं हुआ। उन्होंने तंज कसते हुए कहा—
“नौ दिन चले अढ़ाई कोस… विकास के पहिये थमे हुए हैं।”
जल जीवन मिशन पर आरोप
उन्होंने कहा कि 45 लाख नल कनेक्शन देने का वादा किया गया था, लेकिन अब तक मात्र 14 लाख कनेक्शन ही दिए गए, जो जनता के साथ विश्वासघात है।
वित्तीय स्थिति पर सवाल
राजस्व घाटा अनुमान से बढ़ा।
राजस्व प्राप्तियों में हजारों करोड़ की कमी दर्ज।
जूली ने कहा कि सरकार अपनी नाकामियों का ठीकरा दूसरों पर फोड़ रही है।
शिक्षा और आधारभूत ढांचा
42 हजार जर्जर स्कूलों की स्थिति पर सरकार की चुप्पी, रिफाइनरी परियोजना में देरी और कुछ जिलों की अनदेखी को भी उन्होंने मुद्दा बनाया।
नामकरण और संवेदनशीलता पर टिप्पणी
‘नमो वन’ और ‘नमो नर्सरी’ जैसी घोषणाओं को उन्होंने चापलूसी की राजनीति बताया और मानसिक स्वास्थ्य जैसे गंभीर विषय पर सदन में हुई हंसी-मजाक को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया।
एक ओर सरकार इस बजट को विकास और दीर्घकालिक विजन का आधार बता रही है, वहीं विपक्ष इसे अधूरी घोषणाओं और वित्तीय कुप्रबंधन का दस्तावेज बता रहा है। अब यह देखना होगा कि बजट की घोषणाएं जमीन पर कितनी तेजी से उतरती हैं और प्रदेश की जनता को इसका कितना वास्तविक लाभ मिलता है।