Rajasthan: 2000 KM की चेज़ और सैकड़ों CCTV खंगाले—बिलाली शीतला माता मंदिर दानपात्र चोरी के मास्टरमाइंड पकड़े गए….
राजस्थान के कोटपूतली इलाके में स्थित बिलाली शीतला माता मंदिर से दानपात्र चोरी की गुत्थी आखिरकार सुलझ गई है। 7 नवंबर की रात हुई इस चोरी ने पूरे क्षेत्र में तनाव पैदा कर दिया था। ग्रामीणों के विरोध और दबाव के बीच पुलिस ने 2000 किलोमीटर तक पीछा किया, सैकड़ों CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली और आखिरकार दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
📌 लंबे तलाश अभियान का परिणाम—चोरी कांड के दो आरोपी गिरफ्तार
बासदयाल थाना पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए चोरी में शामिल दो प्रमुख आरोपियों को दबोच लिया। मामले के खुलासे के बाद गांव में फैली बेचैनी कुछ हद तक शांत हुई है। चोरी के बाद ग्रामीणों ने मंदिर की पवित्रता को लेकर नाराजगी जताई थी और आरोपियों की जल्दी गिरफ्तारी की मांग को लेकर धरने पर भी बैठ गए थे।
📌 2000 KM तक पीछा और CCTV फुटेज की मैपिंग—पुलिस की हाई-टेक जांच
पुलिस ने बताया कि चोरी के बाद आरोपियों के मूवमेंट को ट्रैक करने के लिए आसपास के सैकड़ों CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली गई।
हर लोकेशन की बारीकी से मैपिंग करने के बाद टीम ने संदिग्धों का रूट तैयार किया।
इन सुरागों के आधार पर पुलिस ने लगभग 2000 किलोमीटर तक लगातार पीछा किया और आखिरकार दोनों मास्टरमाइंड को गिरफ्तार करने में कामयाबी पाई।
📌 पुजारी की रिपोर्ट के बाद तेज हुई जांच
8 नवंबर को मंदिर के पुजारी लादूराम प्रजापत ने बासदयाल थाना में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
रिपोर्ट मिलते ही पुलिस तुरंत हरकत में आई और विशेष टीम गठित कर जांच शुरू की।
घटना धार्मिक स्थल से जुड़ी होने के कारण पुलिस पर तत्काल कार्रवाई का दबाव भी था।
📌 गिरोह के बाकी सदस्य अभी भी पुलिस के रडार पर
गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में चोरी की योजना, घटनास्थल पर उनकी गतिविधि और अन्य साथियों के बारे में जानकारी निकाली जा रही है।
पुलिस का कहना है कि दानपात्र चोरी में शामिल पूरा गिरोह जल्द ही पकड़ा जाएगा और चोरी की रकम भी बरामद होने की उम्मीद है।
📌 धार्मिक स्थलों में बढ़ती चोरी पर गंभीर सवाल
यह मामला सिर्फ एक चोरी भर नहीं, बल्कि धार्मिक आस्थाओं पर बढ़ते हमलों की ओर इशारा करता है।
ऐसे अपराधों में स्थानीय गिरोह, अंतरजिला नेटवर्क और सुविधाजनक टारगेट के चलते तेजी दिख रही है।
पुलिस का हाई-टेक तरीकों का इस्तेमाल (CCTV मैपिंग, लंबी ट्रैकिंग) यह भी दिखाता है कि अब अपराधियों को पकड़ने के लिए पुराने ढर्रे से आगे बढ़ना पड़ रहा है।
यह केस ऐसे मामलों में भविष्य की जांच के लिए एक मिसाल भी बन सकता है।