लोकसभा में राहुल गांधी के ‘यार’ शब्द पर बवाल, BJP सांसदों ने उठाया सदन की गरिमा का मुद्दा
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण के दौरान इस्तेमाल किए गए ‘यार’ शब्द को लेकर संसद में तीखी बहस छिड़ गई। राष्ट्रीय सुरक्षा और चीन से जुड़े मुद्दों पर बोलते समय राहुल गांधी के बयान पर बीजेपी सांसदों ने आपत्ति जताई, जिसके चलते सदन में हंगामा हुआ और कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
🟠 राष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दे पर राहुल गांधी का बयान
लोकसभा में बोलते हुए राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की एक अप्रकाशित किताब से जुड़े मैगजीन लेख का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा उठा रहे हैं और विपक्ष के नेता होने के नाते उन्हें अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है। राहुल गांधी ने कहा कि वह सीधे तौर पर किताब का उल्लेख नहीं करेंगे, लेकिन लेख में उठाए गए मुद्दे बेहद महत्वपूर्ण हैं।
🟠 ‘यार’ शब्द पर बीजेपी का विरोध
भाषण के दौरान राहुल गांधी ने सदन में कहा – “यार, बोलने तो दो।” इस शब्द के इस्तेमाल पर बीजेपी सांसदों ने कड़ी आपत्ति जताई। पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत कई नेताओं ने इसे संसद की गरिमा के खिलाफ बताया और राहुल गांधी से संयमित भाषा इस्तेमाल करने की मांग की।
🟠 चीन और वैश्विक राजनीति पर राहुल का सवाल
राहुल गांधी ने अपने भाषण में कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में भारत की अंतरराष्ट्रीय रणनीति और चीन-अमेरिका तनाव का मुद्दा अहम है। उन्होंने सवाल उठाया कि भारत और चीन के बीच हाल के घटनाक्रम पर प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया क्या रही और इस पर संसद में चर्चा क्यों नहीं हो रही है।
बीजेपी सांसदों ने इस विषय पर भी आपत्ति जताई, जिसके कारण सदन में शोर-शराबा बढ़ गया।
🟠 हंगामे के कारण कार्यवाही स्थगित
सदन में बढ़ते हंगामे और तीखी नोकझोंक के चलते लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 3 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। यह घटना संसद के मौजूदा सत्र में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच बढ़ती तल्खी को दर्शाती है।
🟠 सोमवार को भी हुआ था टकराव
इससे पहले भी राहुल गांधी के भाषण के दौरान संसद में हंगामा देखने को मिला था। ट्रेजरी बेंच के सांसदों ने राहुल गांधी से अपने दावों के समर्थन में आधिकारिक स्रोत पेश करने की मांग की थी। इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू समेत कई नेताओं ने उनके बयान पर सवाल उठाए थे।
🧠 संसद में भाषा और राजनीतिक टकराव
यह विवाद सिर्फ एक शब्द के इस्तेमाल तक सीमित नहीं है, बल्कि संसद में संवाद की शैली और राजनीतिक टकराव को भी दर्शाता है। जहां विपक्ष राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा की मांग कर रहा है, वहीं सत्ता पक्ष प्रमाण और संसदीय शिष्टाचार पर जोर दे रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद की कार्यवाही और राजनीतिक माहौल दोनों को प्रभावित कर सकता है।