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पुतिन का बड़ा बयान — “रूस यूरोप या नाटो पर हमला नहीं करेगा”

यूरोप को सीधी आश्वस्ति


किर्गिस्तान में आयोजित सीएसटीओ समिट के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूरोपीय देशों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा बयान दिया। पश्चिमी देशों में बढ़ रही भू-राजनीतिक चिंताओं के बीच पुतिन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि रूस का यूरोप पर हमला करने का कोई इरादा नहीं है। उनके इस बयान ने वैश्विक कूटनीति में नई चर्चा को जन्म दे दिया है।

“पुतिन बोले—हम लिखकर देने को तैयार, रूस यूरोप पर हमला नहीं करेगा”

पुतिन की दो-टूक—“हमला करने का कोई इरादा नहीं”

कलेक्टिव सिक्योरिटी ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन (CSTO) की बैठक में भाग लेते हुए पुतिन ने यूरोपीय नेताओं को आश्वस्त किया कि रूस किसी भी तरह का आक्रमण करने की योजना नहीं बना रहा है।
उन्होंने कहा— “हम आधिकारिक तौर पर लिखित में भी आश्वासन देने को तैयार हैं कि रूस कभी यूरोप या नाटो देशों पर हमला नहीं करेगा।”

पश्चिमी आरोपों पर कड़ा जवाब

पुतिन ने यूरोप और नाटो की ओर से लगाए गए आरोपों को—
“बेतुका” और “पूरी तरह झूठ” बताया।
उन्होंने कहा कि रूस पर आक्रमणकारी मंशा का आरोप सिर्फ एक “राजनीतिक नैरेटिव” है, जिसे पश्चिमी देश अपने हितों के लिए प्रचारित कर रहे हैं।

भू-राजनीतिक संतुलन पर पुतिन का संदेश

सीएसटीओ मंच से पुतिन ने संकेत दिया कि वर्तमान अंतरराष्ट्रीय माहौल में रूस किसी बड़े संघर्ष में रुचि नहीं रखता।
उनके बयान का उद्देश्य यूरोप में फैल रही सुरक्षा चिंताओं को कम करना और रूस को बातचीत की मेज पर एक ज़िम्मेदार खिलाड़ी के रूप में दिखाना माना जा रहा है।

पुतिन के बयान का क्या मायने?
तनाव कम करने की कोशिश

यूरोप—विशेष रूप से नाटो देश—यूक्रेन युद्ध के बाद से रूस को संभावित खतरा मानते रहे हैं। पुतिन का यह बयान कूटनीतिक तनाव को कम करने का प्रयास भी हो सकता है।

अंतरराष्ट्रीय दबाव का असर

रूस पर लगातार बढ़ते अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध और आर्थिक चुनौतियाँ उसे बातचीत की टोन नरम करने के लिए मजबूर कर सकती हैं।

रणनीतिक संदेश

पुतिन द्वारा “लिखित आश्वासन” देने की पेशकश एक प्रतीकात्मक रणनीति भी हो सकती है, जिससे रूस खुद को आक्रामक नहीं बल्कि रक्षात्मक राष्ट्र के रूप में पेश करना चाहता है।

नाटो के लिए नई चुनौती

यूरोपीय देश पुतिन के बयान को सीधे तौर पर स्वीकार नहीं करेंगे, लेकिन यह संदेश नाटो के भीतर भी नई बहस शुरू कर सकता है कि क्या रूस वास्तव में हमले की योजना बनाना चाहता है या नहीं।

“कूटनीति की नई चाल? पुतिन ने यूरोप को दी लिखित सुरक्षा गारंटी की पेशकश”

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