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रक्षक बना भक्षक: विमंदित युवती से दुष्कर्म के आरोपी को आजीवन कारावास

विशिष्ट न्यायाधीश पोक्सो अधिनियम संख्या-3, अलवर श्रीमती हिंमाकनी गौड ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दुष्कर्म के आरोपी संतोष उर्फ सुरेश मुंडा (55), निवासी हल्दीवाड़ी, अलीपुरद्वार (प. बंगाल) को अंतिम सांस तक आजीवन कारावास और 50,000 अर्थदंड की सजा से दंडित किया है।

विशिष्ट लोक अभियोजक सुनील कुमार शर्मा के अनुसार मामले में 2 जून 2024 को एक संस्था संचालक ने विजयमंदिर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बताया गया कि 1 जून को संस्था के पार्क में एक 24 वर्षीय विमंदित पीड़िता के साथ, उसी संस्था में कार्यरत गार्ड संतोष ने दुष्कर्म किया। यह जघन्य कृत्य संस्था के ही एक अन्य कर्मचारी ने प्रत्यक्ष रूप से देख लिया था।

आरोपी संतोष कुछ समय पूर्व पैर में चोट लगने के बाद संस्था में नौकरी की तलाश में आया था, जिसके बाद उसे गार्ड नियुक्त किया गया था। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर एसएचओ शिवदयाल के नेतृत्व में विस्तृत अनुसंधान किया और आरोप–पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।

अभियोजन द्वारा अदालत में 17 गवाहों के बयान और 43 दस्तावेजों को प्रस्तुत किया गया। सभी पक्षों की सुनवाई के बाद न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार दिया।

सजा निर्धारित करते हुए न्यायालय ने टिप्पणी की कि घटना के समय आरोपी संस्था में रक्षक की भूमिका में था, लेकिन उसने विरोध करने में असमर्थ विमंदित युवती का शोषण कर “रक्षक से भक्षक” बनने का अपराध किया, जिसका समाज पर अत्यंत दुष्प्रभाव पड़ता है। अदालत ने माना कि पीड़िताओं की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने के लिए शेष प्राकृतिक जीवन तक कारावास की सजा न्यायोचित है।

न्यायालय ने पीड़िता को 2 लाख रुपये प्रतिकर दिलवाने की भी अनुशंसा की है।

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