INS वाघशीर पर ‘महामहिम’: राष्ट्रपति मुर्मू ने स्वदेशी पनडुब्बी से नापा समंदर का गर्भ
भारत की रक्षा शक्ति के इतिहास में एक और गौरवपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वदेशी पनडुब्बी INS वाघशीर पर सवार होकर समुद्र की गहराइयों में यात्रा की। यह दौरा न केवल भारतीय नौसेना की ताकत को दर्शाता है, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत की सोच को भी मजबूती देता है।
🟡 1. पनडुब्बी में राष्ट्रपति की ऐतिहासिक यात्रा
कर्नाटक के करवार नेवल बेस से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कलवरी क्लास की पनडुब्बी INS वाघशीर पर समुद्री यात्रा की। उनके साथ नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी भी मौजूद रहे। यह राष्ट्रपति मुर्मू की पनडुब्बी में पहली यात्रा थी।
🟡 2. डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के बाद दूसरी ऐतिहासिक मिसाल
इससे पहले वर्ष 2006 में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने विशाखापट्टनम में रूसी मूल की किलो-क्लास पनडुब्बी INS सिंधुरक्षक में यात्रा की थी। खास बात यह है कि राष्ट्रपति मुर्मू ने पूरी तरह स्वदेशी पनडुब्बी को चुना।
🟡 3. INS वाघशीर: ‘मेक इन इंडिया’ की समुद्री ताकत
INS वाघशीर को मुंबई के मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने फ्रांस के सहयोग से भारत में ही बनाया है। इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 जनवरी 2025 को राष्ट्र को समर्पित किया था। इसका नाम हिंद महासागर में पाई जाने वाली सैंड फिश पर रखा गया है।
🟡 4. दुश्मनों के लिए काल समान पनडुब्बी
INS वाघशीर एक अत्याधुनिक डीजल-इलेक्ट्रिक अटैक सबमरीन है, जो स्टील्थ तकनीक, आधुनिक सेंसर और घातक हथियारों से लैस है। यह पनडुब्बी समुद्र के भीतर रहकर दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने और हमला करने में सक्षम है।
🟡 5. आसमान से समंदर तक राष्ट्रपति का सैन्य अनुभव
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इससे पहले
- 2023 में सुखोई-30 MKI
- अक्टूबर 2024 में राफेल फाइटर जेट
में उड़ान भर चुकी हैं।
इसके अलावा 4 नवंबर 2024 को वह स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत का भी दौरा कर चुकी हैं।
🟡 6. करवार नेवल बेस का रणनीतिक महत्व
करवार नौसेना बेस भारत के पश्चिमी तट का एक अहम रणनीतिक केंद्र है। यहां भारतीय नौसेना के कई अत्याधुनिक युद्धपोत और पनडुब्बियां तैनात हैं, जो समुद्री सुरक्षा की रीढ़ मानी जाती हैं।
🟡 7. नौसैनिकों के सम्मान का प्रतीक दौरा
राष्ट्रपति की यह यात्रा केवल औपचारिक नहीं थी। यह उन जांबाज नौसैनिकों के प्रति सम्मान की अभिव्यक्ति है, जो हफ्तों तक सूरज की रोशनी देखे बिना कठिन परिस्थितियों में देश की समुद्री सीमाओं की रक्षा करते हैं।
INS वाघशीर पर राष्ट्रपति मुर्मू की मौजूदगी ने साफ संदेश दिया है कि भारत न सिर्फ अपनी रक्षा जरूरतों को खुद पूरा कर रहा है, बल्कि समुद्र की गहराइयों में भी पूरी तरह सक्षम है। यह दौरा आत्मनिर्भर भारत, मजबूत नौसेना और निर्णायक नेतृत्व का प्रतीक बनकर उभरा है।