नगर निगमों पर सियासी घमासान: झाबर सिंह खर्रा का पलटवार, बोले— कांग्रेस ने राजनीतिक फायदे के लिए किए थे निगमों के टुकड़े…
राजस्थान में नगर निगमों को लेकर सियासी बयानबाजी तेज़ हो गई है। एक ओर जहां कांग्रेस नेताओं ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा, वहीं दूसरी ओर नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन राज्यमंत्री झाबर सिंह खर्रा ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस ने अपने शासन में राजनीतिक स्वार्थ के चलते नगर निगमों का विभाजन किया था। उन्होंने कहा कि आज भाजपा की सुशासन नीति से विपक्ष बौखला गया है।
कांग्रेस पर पलटवार: “राजनीतिक लाभ के लिए किए टुकड़े”
झाबर सिंह खर्रा ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने जयपुर, जोधपुर और कोटा के नगर निगमों को सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए दो-दो हिस्सों में बांट दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि यह फैसला जनता के हित में नहीं, बल्कि कुछ नेताओं की व्यक्तिगत इच्छाओं की पूर्ति के लिए लिया गया था।
भाजपा सरकार पर लगे आरोपों को बताया “बेबुनियाद”
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए खर्रा ने कहा कि भाजपा सरकार ने तथ्यों और अन्य राज्यों की व्यवस्थाओं को ध्यान में रखकर ही निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं की बयानबाजी से साफ झलकता है कि भाजपा सरकार के सुशासन से वे असहज महसूस कर रहे हैं।
“कांग्रेस नेताओं के राजनीतिक हितों पर लगी चोट”
राज्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस नेताओं की हालिया टिप्पणियों से यह स्पष्ट है कि नगर निगमों के पुनर्गठन से उनके राजनीतिक हितों को नुकसान पहुंचा है। यही कारण है कि वे जनता को भ्रामक जानकारी देकर गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन अब जनता जागरूक है और कांग्रेस के कुत्सित प्रयासों को सफल नहीं होने देगी।
“जनता देख रही है कौन कर रहा विकास”
खर्रा ने कहा कि भाजपा सरकार पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन देने के लिए प्रतिबद्ध है। निगमों के पुनर्गठन का उद्देश्य प्रशासनिक कुशलता बढ़ाना और स्थानीय विकास को गति देना है। उन्होंने विश्वास जताया कि जनता स्वयं तय करेगी कि किसने विकास किया और किसने राजनीति।
राजस्थान में नगर निगमों का मुद्दा अब पूरी तरह सियासी रंग ले चुका है। एक ओर कांग्रेस इसे भाजपा का सत्ता-केन्द्रित कदम बता रही है, तो वहीं भाजपा कांग्रेस पर राजनीतिक लाभ के लिए संरचनात्मक बदलाव करने का आरोप लगा रही है। आने वाले समय में यह विवाद राज्य की राजनीति में नया मोर्चा खोल सकता है।