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भूटान दौरे में बोले पीएम मोदी: ‘दिल्ली घटना के षड्यंत्रकारी बख्शे नहीं जाएंगे’, भारत-भूटान रिश्तों को बताया ‘आध्यात्मिक साझेदारी’…

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को भूटान की राजधानी थिम्पू में दिए अपने संबोधन में जहां भारत-भूटान की गहरी मित्रता पर जोर दिया, वहीं दिल्ली में हुई भयावह घटना पर कड़ा संदेश भी दिया। मोदी ने कहा कि इस कृत्य के पीछे जो भी षड्यंत्रकारी हैं, उन्हें किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा। उनके इस बयान को देश-विदेश में सुरक्षा और जवाबदेही के स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

भूटान-भारत संबंधों पर जोर: “यह सिर्फ पड़ोसी नहीं, आत्मीय मित्रता है”

थिम्पू में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और भूटान का रिश्ता सिर्फ भौगोलिक सीमाओं का नहीं, बल्कि दिलों का है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक जुड़ाव सदियों पुराना है, जो किसी समझौते से नहीं बल्कि साझा मूल्यों से बना है। मोदी ने भूटान को भारत का “सच्चा और भरोसेमंद सहयोगी” बताया और इसे क्षेत्रीय शांति व विकास का उदाहरण कहा।

दिल्ली धमाके पर सख्त रुख: “षड्यंत्रकारी नहीं बचेंगे”

अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने रविवार रात दिल्ली में हुई विस्फोटक घटना पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा, “कल शाम दिल्ली में हुई भयावह घटना ने सभी के मन को व्यथित कर दिया है। मैं पीड़ित परिवारों के साथ हूं। आज पूरा देश उनके साथ खड़ा है और इस घटना के षड्यंत्रकारियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।”
मोदी के इस बयान को सुरक्षा एजेंसियों के लिए स्पष्ट निर्देश माना जा रहा है कि सरकार ऐसी घटनाओं पर “ज़ीरो टॉलरेंस” नीति से पीछे नहीं हटेगी।

ऊर्जा परियोजनाओं से नई साझेदारी: ‘पुनात्सांगछू-II प्रोजेक्ट’ बना मील का पत्थर

भूटान यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को नई दिशा दी। उन्होंने 1000 मेगावाट क्षमता वाले पुनात्सांगछू-II हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया। यह परियोजना भारत-भूटान संबंधों में आर्थिक मजबूती का प्रतीक मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना से न केवल भूटान को ऊर्जा निर्यात का लाभ मिलेगा, बल्कि भारत की हरित ऊर्जा नीति को भी गति मिलेगी।

कनेक्टिविटी और निवेश पर फोकस: ‘सीमा से परे बढ़ता सहयोग’

मोदी ने कहा कि भारत-भूटान रिश्ते अब परंपरागत सहायता से आगे बढ़कर निवेश, शिक्षा, तकनीक और युवाओं के आदान-प्रदान तक विस्तृत हो रहे हैं। उन्होंने नए रेल-सड़क संपर्क, डिजिटल पेमेंट सहयोग और व्यापारिक सुगमता को दोनों देशों के बीच आर्थिक प्रगति की नई रीढ़ बताया।

प्रधानमंत्री मोदी का यह भूटान दौरा केवल एक राजनयिक यात्रा नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया में भारत की संतुलित और संवेदनशील नीति का प्रदर्शन था। एक ओर उन्होंने शांति और विकास की बात की, वहीं दूसरी ओर देश की सुरक्षा को लेकर कठोर रुख भी दिखाया। यह संतुलन मोदी की विदेश नीति का वह पक्ष है, जो मित्रता के साथ-साथ दृढ़ता का संदेश भी देता है।

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