राजगढ़ में फुले-अंबेडकर संगोष्ठी, कुरीतियों पर प्रहार
अलवर जिले के राजगढ़ में फुले और अंबेडकर के विचारों पर आधारित संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन, शिक्षा के प्रसार और जागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।
विचार संगोष्ठी में महापुरुषों के योगदान पर चर्चा
राजगढ़ कस्बे के गंगाबाग स्थित अंबेडकर भवन में बीआर अंबेडकर समिति और आदिवासी सेवा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महात्मा ज्योतिबा राव फुले और डॉ. भीमराव अंबेडकर के जीवन, संघर्ष और समाज सुधार में उनके योगदान पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने बताया कि इन महापुरुषों ने सामाजिक समानता, शिक्षा और न्याय के लिए जो संघर्ष किया, वह आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक है।
शिक्षा और सामाजिक सुधार पर दिया गया जोर
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य केएल मीना ने कहा कि शिक्षा ही समाज को आगे बढ़ाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने फुले और अंबेडकर के विचारों को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि इन महापुरुषों ने समाज में व्याप्त असमानता और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई। उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं और इन्हें व्यवहार में लाना समय की जरूरत है।
गांव-गांव जागरूकता फैलाने का संकल्प
बीआर अंबेडकर समिति के अध्यक्ष अमर सिंह वर्मा और राजेंद्र प्रसाद बैरवा ने बताया कि इस तरह की संगोष्ठियों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि समाज में बदलाव लाने के लिए लोगों को शिक्षित और जागरूक करना जरूरी है। समिति का उद्देश्य फुले और अंबेडकर के विचारों को जन-जन तक पहुंचाना है, ताकि समाज में सकारात्मक परिवर्तन आ सके।
सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ उठी आवाज
संगोष्ठी में मृत्यु भोज, बाल विवाह, छुआछूत, भेदभाव और अशिक्षा जैसी सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि इन बुराइयों को खत्म किए बिना समाज का समग्र विकास संभव नहीं है। साथ ही नारी शिक्षा को बढ़ावा देने और महिलाओं की सभी क्षेत्रों में भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।
अंबेडकर जयंती मनाने का लिया निर्णय
कार्यक्रम के अंत में आगामी 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती को धूमधाम से मनाने का निर्णय लिया गया। इस अवसर पर विभिन्न सामाजिक और शैक्षणिक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। आयोजकों ने लोगों से बड़ी संख्या में भाग लेने की अपील की, ताकि महापुरुषों के विचारों को और अधिक व्यापक स्तर पर फैलाया जा सके।