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आगरा में पालतू डॉग ‘टाइगर’ को बेटे जैसी विदाई, हिंदू रीति-रिवाजों से हुआ अंतिम संस्कार….

4 साल साथ निभाने वाले पालतू को परिवार ने दी भावुक श्रद्धांजलि
आगरा के ट्रांस यमुना क्षेत्र से एक भावुक और अनोखा मामला सामने आया है, जहां एक परिवार ने अपने 14 वर्षीय पालतू कुत्ते ‘टाइगर’ की मृत्यु के बाद उसे बेटे की तरह सम्मान देते हुए हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार किया। परिवार की इस पहल ने पशु-प्रेम और भावनात्मक जुड़ाव की मिसाल पेश की है।


बीमारी के बाद हुई मौत, परिवार में शोक का माहौल
जानकारी के अनुसार शाहदरा बगीची निवासी परिवार पिछले 14 वर्षों से लेब्राडोर नस्ल के ‘टाइगर’ को अपने घर का सदस्य मानकर पाल रहा था। करीब एक महीने पहले उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिजनों ने इलाज कराया, लेकिन प्रयासों के बावजूद उसकी मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद परिवार गहरे शोक में डूब गया।


गंगा घाट पर विधि-विधान से अंतिम संस्कार
परिजनों ने ‘टाइगर’ का अंतिम संस्कार हिंदू परंपराओं के अनुसार गंगा जी के राजघाट पर किया। परिवार ने अंतिम विदाई के दौरान वे सभी रस्में निभाईं जो सामान्यतः परिवार के किसी सदस्य के निधन पर की जाती हैं। इससे स्थानीय लोगों में भी इस घटना को लेकर चर्चा रही।


मुंडन, हवन और ब्रह्मभोज की रस्में भी निभाईं
अंतिम संस्कार के बाद परिवार ने शोक संस्कारों की कड़ी में मुंडन कराया। 13 दिन पूरे होने पर आत्मा की शांति के लिए हवन-पूजन और ब्रह्मभोज का आयोजन किया गया, जिसमें मोहल्ले के लोग भी शामिल हुए और परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।


“पालतू नहीं, परिवार का सदस्य था” – परिजन
परिवार के सदस्य घनश्याम दीक्षित ने बताया कि ‘टाइगर’ को वर्षों पहले दिल्ली से लाया गया था और उसे बेटे की तरह पाला गया। उनके अनुसार वह केवल पालतू जानवर नहीं, बल्कि घर का अभिन्न हिस्सा था, जो सुख-दुख के हर पल में साथ रहा।


समाज में पशु-प्रेम और संवेदनशीलता पर चर्चा
इस घटना ने स्थानीय स्तर पर पशुओं के प्रति संवेदनशीलता और भावनात्मक संबंधों पर नई चर्चा छेड़ दी है। कई लोगों ने इसे इंसान-पशु संबंधों की गहराई का उदाहरण बताया, जबकि कुछ ने इसे व्यक्तिगत आस्था और परिवार की भावनाओं से जुड़ा निर्णय माना।

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