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पवन खेड़ा का पलटवार—“डरना हमारी आदत नहीं”, असम सीएम पर आरोप दोहराए, जमानत के लिए हाई कोर्ट का रुख

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और उनके परिवार पर लगाए गए आरोपों को एक बार फिर दोहराते हुए कहा कि वे किसी भी दबाव या धमकी से पीछे हटने वाले नहीं हैं। खेड़ा ने तेलंगाना हाई कोर्ट में जमानत याचिका दायर की है और एक वीडियो जारी कर अपनी बात मजबूती से रखी है। इस मुद्दे पर कांग्रेस ने भी खुलकर उनका समर्थन किया है।

धमकियों के बीच खेड़ा का सख्त रुख

पवन खेड़ा ने अपने वीडियो संदेश में स्पष्ट कहा कि वे और उनकी पार्टी किसी भी तरह की धमकी से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने खुद को कांग्रेस और राहुल गांधी का “सिपाही” बताते हुए कहा कि सवाल उठाना उनका अधिकार है और वे इसे जारी रखेंगे। खेड़ा ने दावा किया कि पुलिस कार्रवाई के बावजूद उनका मनोबल कमजोर नहीं हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की जिम्मेदारी है कि वह सरकार से जवाब मांगे और जनता के मुद्दों को सामने लाए।

छापेमारी और पुलिस कार्रवाई पर सवाल

खेड़ा ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे और कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए। उनके अनुसार, एक पुराना फोन, एक अप्रयुक्त लैपटॉप और नया iPad तक ले जाया गया। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि जब्त की गई कुछ पेन ड्राइव्स उनकी नहीं हो सकतीं। खेड़ा ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई उन्हें डराने और उनकी आवाज दबाने के लिए की गई है, ताकि वे संवेदनशील मुद्दों पर सवाल न उठा सकें।

विदेशी कंपनियों और संपत्तियों को लेकर आरोप

खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा से जुड़े कथित वित्तीय मामलों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि विदेशों में रजिस्टर्ड एक कंपनी और उससे जुड़े पते संदिग्ध हैं। साथ ही, उन्होंने विदेशी पासपोर्ट, गोल्डन वीजा और संभावित शेल कंपनियों के इस्तेमाल जैसे गंभीर आरोपों का जिक्र किया। खेड़ा ने कहा कि इन मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।

कांग्रेस का समर्थन और सरकार पर हमला

इस पूरे विवाद में कांग्रेस ने पवन खेड़ा के समर्थन में खुलकर आवाज उठाई है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह कार्रवाई राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सवाल उठाना जरूरी है और इसे दबाने की कोशिश लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। प्रियंका गांधी ने यह भी दोहराया कि पार्टी अपने नेता के साथ मजबूती से खड़ी है

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