पाकिस्तान में शादी के जश्न में आत्मघाती धमाका, 5 की मौत, 10 घायल
🟠 खुशियों के बीच मौत का साया
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक शादी समारोह उस वक्त मातम में बदल गया, जब जश्न के बीच आत्मघाती हमलावर ने खुद को उड़ा लिया। इस हमले में कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि दस लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। घटना से पूरे इलाके में दहशत फैल गई है।
🟠 डांस के दौरान हुआ धमाका
यह हमला डेरा इस्माइल खान जिले में शांति समिति के सदस्य नूर आलम महसूद के घर पर हुआ, जहां शादी समारोह चल रहा था। जिला पुलिस अधिकारी (DPO) सज्जाद अहमद साहिबज़ादा के मुताबिक, मेहमान डांस कर रहे थे, तभी आत्मघाती हमलावर ने खुद को विस्फोट से उड़ा लिया।
धमाका इतना तेज था कि कमरे की छत ढह गई, जिससे कई लोग मलबे में दब गए।
🟠 मलबे में फंसे लोगों को निकालने में मुश्किल
विस्फोट के बाद राहत और बचाव कार्य में काफी कठिनाई आई। छत गिरने के कारण घायलों तक पहुंचना मुश्किल हो गया। घटना के तुरंत बाद जिला मुख्यालय अस्पताल में आपात स्थिति घोषित कर दी गई।
🟠 रेस्क्यू 1122 ने क्या बताया
रेस्क्यू 1122 के प्रवक्ता बिलाल अहमद फैजी ने बताया कि
- 5 शव अस्पताल पहुंचाए गए
- 10 घायलों का इलाज जारी है
- मौके पर 7 एंबुलेंस, 1 फायर ब्रिगेड और 1 डिजास्टर रिस्पांस वाहन भेजा गया
रेस्क्यू ऑपरेशन देर रात तक जारी रहा।
🟠 शांति समिति के सदस्य भी मारे गए
प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, शांति समिति के वरिष्ठ सदस्य वहीदुल्लाह महसूद उर्फ जिगरी महसूद भी इस हमले में मारे गए हैं। घटना के बाद सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को घेर लिया और जांच शुरू कर दी है।
🟠 मुख्यमंत्री ने की कड़ी निंदा
खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने इस आत्मघाती हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने पुलिस महानिरीक्षक से विस्तृत रिपोर्ट तलब की और कहा कि दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
🟠 पहले भी निशाने पर रही शांति समिति
यह पहली बार नहीं है जब शांति समिति को निशाना बनाया गया हो।
- इसी महीने की शुरुआत में बन्नू जिले में शांति समिति के 4 सदस्यों की हत्या कर दी गई थी
- नवंबर 2025 में बन्नू में शांति समिति के कार्यालय पर हुए हमले में 7 लोगों की मौत हुई थी
इन घटनाओं से साफ है कि आतंकवादी संगठन स्थानीय स्तर पर शांति प्रयासों को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।
🟠 आतंकियों का नया संदेश
शादी जैसे निजी और सार्वजनिक समारोह को निशाना बनाना यह दिखाता है कि आतंकी संगठन अब डर फैलाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। शांति समिति के सदस्यों पर लगातार हमले यह संकेत देते हैं कि आतंकवाद के खिलाफ स्थानीय सहयोग को तोड़ना ही उनका मुख्य मकसद है।