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मुनीर की फौज बनाम तालिबान: हथियार, सैनिक और ताकत… आंकड़ों में कौन कितना मजबूत?


पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने दक्षिण एशिया की सुरक्षा चिंताओं को फिर बढ़ा दिया है। पाकिस्तान ने संघर्ष को “खुली जंग” जैसा बताया है, जबकि तालिबान भी जवाबी कार्रवाई के दावे कर रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है—आधुनिक हथियारों से लैस पाकिस्तान की सेना के सामने तालिबान कितनी देर टिक सकता है? आइए अंतरराष्ट्रीय रक्षा आंकड़ों के आधार पर दोनों पक्षों की सैन्य ताकत समझते हैं।


⚔️ युद्ध की पृष्ठभूमि

सीमा पर बढ़ती झड़पों के बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे को भारी नुकसान पहुंचाने के दावे किए हैं। सैन्य विशेषज्ञ मानते हैं कि यह संघर्ष पारंपरिक युद्ध और सीमावर्ती गुरिल्ला लड़ाई का मिश्रण बनता जा रहा है।

जंग केवल हथियारों की नहीं बल्कि रणनीति और भूगोल की भी बन चुकी है।


🪖 सेना की ताकत: संख्या में भारी पाकिस्तान

लंदन स्थित International Institute for Strategic Studies के आंकड़ों के अनुसार:

🇵🇰 पाकिस्तान

  • कुल सक्रिय सैनिक: 6,60,000
  • थल सेना: 5,60,000
  • वायुसेना: 70,000
  • नौसेना: 30,000

🇦🇫 अफगान तालिबान

  • सक्रिय लड़ाके: लगभग 1,72,000
  • लक्ष्य: सेना को 2 लाख तक बढ़ाने की योजना

संख्या और संरचना दोनों में पाकिस्तान को स्पष्ट बढ़त हासिल है।



✈️ वायुसेना: जंग का सबसे बड़ा अंतर

पाकिस्तान

  • 465 लड़ाकू विमान
  • 260+ हेलीकॉप्टर
  • आधुनिक एयरस्ट्राइक क्षमता

तालिबान

  • कोई सक्रिय लड़ाकू जेट नहीं
  • लगभग 6 पुराने विमान
  • करीब 23 हेलीकॉप्टर (ऑपरेशनल स्थिति स्पष्ट नहीं)

हवाई शक्ति के मामले में तालिबान लगभग शून्य स्थिति में है, जिससे पाकिस्तान को रणनीतिक बढ़त मिलती है।


🚜 बख्तरबंद वाहन और तोपखाना

पाकिस्तान

  • 6,000 से ज्यादा बख्तरबंद वाहन
  • 4,600 से अधिक तोपें

तालिबान

  • सीमित सोवियत काल के टैंक और वाहन
  • तोपखाने की सटीक संख्या सार्वजनिक नहीं

पारंपरिक जमीन युद्ध में पाकिस्तान की क्षमता कई गुना अधिक है।


☢️ परमाणु शक्ति: निर्णायक असमानता

पाकिस्तान विश्व की परमाणु शक्तियों में शामिल है और उसके पास लगभग 170 परमाणु वारहेड माने जाते हैं।

तालिबान के पास कोई परमाणु हथियार या सामरिक प्रतिरोध क्षमता नहीं है।

परमाणु शक्ति प्रत्यक्ष युद्ध में नहीं बल्कि रणनीतिक दबाव बनाने का साधन होती है।


🧠 सैन्य ढांचा और संसाधन

पाकिस्तान:

  • नियमित भर्ती प्रणाली
  • अंतरराष्ट्रीय रक्षा साझेदारी
  • आधुनिक सैन्य आधुनिकीकरण कार्यक्रम

तालिबान:

  • 2021 के बाद कब्जे में मिले विदेशी हथियार
  • सीमित रखरखाव क्षमता
  • अंतरराष्ट्रीय मान्यता की कमी

लंबी जंग में संसाधन और लॉजिस्टिक्स निर्णायक भूमिका निभाते हैं, जहां तालिबान कमजोर पड़ सकता है।


⚡ फिर भी तालिबान क्यों चुनौती बना हुआ है?

हालांकि सैन्य आंकड़ों में पाकिस्तान स्पष्ट रूप से आगे है, लेकिन जमीन पर तालिबान की ताकत अलग कारकों से आती है:

  • गुरिल्ला युद्ध शैली
  • पहाड़ी सीमा क्षेत्र
  • स्थानीय नेटवर्क और तेज मूवमेंट

इतिहास बताता है कि छोटे लड़ाके भी बड़ी सेनाओं को लंबे समय तक उलझाए रख सकते हैं।


🌍 बड़ी तस्वीर

यह संघर्ष पारंपरिक सेना बनाम असंगठित लड़ाकों की लड़ाई का उदाहरण है। आधुनिक हथियार निर्णायक जीत की गारंटी नहीं देते, खासकर जब युद्ध सीमावर्ती और असममित (Asymmetric Warfare) हो।


आंकड़ों के आधार पर पाकिस्तान सैन्य शक्ति में तालिबान से कई गुना मजबूत है, लेकिन जमीनी वास्तविकता यह दिखाती है कि युद्ध केवल हथियारों से नहीं जीते जाते। रणनीति, भूगोल और स्थानीय समर्थन ही इस संघर्ष का अंतिम परिणाम तय करेंगे।

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