‘भिखारियों का एक्सपोर्टर’ बना पाकिस्तान? रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का बड़ा कबूलनामा
🇵🇰 रक्षा मंत्री का बयान
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री Khawaja Asif ने स्वीकार किया है कि देश में भीख मांगना अब केवल मजबूरी नहीं बल्कि संगठित धंधा बन चुका है।
उन्होंने कहा कि तथाकथित “भिखारी माफिया” महिलाओं, बच्चों और नकली दिव्यांगों की भर्ती कर उन्हें खाड़ी देशों में भेजता है, जिससे पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंच रहा है।
💰 संगठित नेटवर्क का दावा
रिपोर्टों के अनुसार, मंत्री ने बताया कि:
- भिखारियों के ठेकेदार बाकायदा भर्ती अभियान चलाते हैं।
- हजारों लोगों को खाड़ी देशों में भेजा जाता है।
- कुछ मामलों में नकली दिव्यांगता दिखाकर सहानुभूति के जरिए कमाई की जाती है।
- इस नेटवर्क में स्थानीय प्रशासन, एयरपोर्ट स्टाफ और पुलिस की मिलीभगत की भी आशंका जताई गई है।
सोशल मीडिया पर साझा एक वीडियो में दावा किया गया कि फैसलाबाद जैसे शहरों में कुछ भिखारी परिवारों ने भीख से मोटी कमाई कर संपत्ति तक बना ली है।
🌍 खाड़ी देशों की सख्ती
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, United Arab Emirates, Saudi Arabia और अन्य खाड़ी देशों ने वीजा नियमों को सख्त किया है।
बताया गया कि:
- 2019 से 2025 के बीच 7,800 से अधिक पाकिस्तानियों को भीख मांगने समेत अन्य आरोपों में विदेश से डिपोर्ट किया गया।
- 2025 में डिपोर्ट किए गए लोगों के पासपोर्ट रद्द करने की कार्रवाई भी शुरू की गई।
- दिसंबर 2024 में पाकिस्तान के कई शहरों के आवेदकों पर वीजा प्रतिबंध लगाए गए।
इन कदमों का मकसद अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना बताया गया है।
📉 छवि और कूटनीतिक असर
विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे मामलों से:
- पाकिस्तान की श्रम निर्यात छवि प्रभावित होती है।
- खाड़ी देशों में काम करने वाले वैध प्रवासी भी सख्ती का सामना करते हैं।
- कूटनीतिक संबंधों पर दबाव बढ़ता है।
रक्षा मंत्री का यह बयान पाकिस्तान के लिए एक गंभीर आत्ममंथन का संकेत है। यदि संगठित नेटवर्क और कथित मिलीभगत के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल सामाजिक समस्या नहीं बल्कि प्रशासनिक और कूटनीतिक चुनौती भी है।
अब देखना होगा कि इस कथित “भिखारी माफिया” के खिलाफ पाकिस्तान सरकार कितनी प्रभावी कार्रवाई कर पाती है और क्या इससे खाड़ी देशों के साथ वीजा संबंध सामान्य हो पाते हैं।