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अविश्वास प्रस्ताव पर फैसला होने तक स्पीकर की कुर्सी से दूर रहेंगे ओम बिरला

लोकसभा में विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के बाद स्पीकर ओम बिरला ने एक अहम और असाधारण निर्णय लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब तक सदन में उनके खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक वे लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी पर नहीं बैठेंगे। नियमों में ऐसी कोई बाध्यता नहीं होने के बावजूद उन्होंने यह फैसला स्वयं लिया है।

9 मार्च को स्पीकर हटाने के प्रस्ताव पर हो सकती है चर्चा

सूत्रों के अनुसार, बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन यानी 9 मार्च को लोकसभा स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा संभव है। प्रक्रिया के तहत पहले सदन में कम से कम 50 सांसदों से समर्थन के लिए हाथ खड़े कराए जाएंगे। इसके बाद पीठासीन अधिकारी इस प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दे सकते हैं।

अविश्वास प्रस्ताव पर 118 सांसदों के हस्ताक्षर

कांग्रेस सूत्रों का दावा है कि लोकसभा स्पीकर के खिलाफ लाए गए नो-कॉन्फिडेंस मोशन के नोटिस पर कुल 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का कहना है कि यह प्रस्ताव सदन की कार्यवाही में कथित पक्षपात को लेकर लाया गया है।

विपक्ष का आरोप: सदन में निष्पक्षता नहीं बरती गई

विपक्षी दलों ने स्पीकर ओम बिरला पर भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि विपक्षी नेताओं को बार-बार बोलने से रोका गया और महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की अनुमति नहीं दी गई। अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस में स्पीकर के खिलाफ चार घटनाओं का उल्लेख किया गया है।

राहुल गांधी को बोलने से रोके जाने का भी जिक्र

विपक्ष का आरोप है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने नहीं दिया गया। राहुल गांधी चीन के साथ 2020 के सैन्य गतिरोध पर चर्चा करते हुए पूर्व थलसेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे की एक अप्रकाशित पुस्तक का संदर्भ दे रहे थे, लेकिन उन्हें अपनी बात पूरी करने का अवसर नहीं मिला।

सांसदों के निलंबन और आपत्तिजनक टिप्पणियों का मुद्दा

अविश्वास प्रस्ताव में आठ सांसदों के निलंबन का मुद्दा भी उठाया गया है। साथ ही BJP सांसद निशिकांत दुबे द्वारा पूर्व प्रधानमंत्रियों पर की गई कथित “आपत्तिजनक और व्यक्तिगत टिप्पणियों” का भी उल्लेख किया गया है, जिस पर विपक्ष का कहना है कि स्पीकर ने कोई कार्रवाई नहीं की।

प्रधानमंत्री से सदन में न आने का आग्रह बना विवाद की वजह

विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला के एक बयान पर भी आपत्ति जताई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सदन में न आने का आग्रह किया था। स्पीकर के अनुसार, उन्हें सूचना मिली थी कि कुछ कांग्रेस सांसद प्रधानमंत्री की सीट तक जाकर ऐसी घटना कर सकते हैं, जो पहले कभी नहीं हुई।

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