US कोर्ट में भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता ने हत्या की साजिश का जुर्म कबूला
अमेरिका में खालिस्तानी अलगाववादी नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की कथित साजिश से जुड़े मामले में भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता ने US कोर्ट में अपने खिलाफ लगे आरोप स्वीकार कर लिए हैं। यह साजिश विफल रही थी, लेकिन जांच एजेंसियों के अनुसार योजना को अंजाम देने की कोशिश की गई थी।
कोर्ट की कार्रवाई और अगली सुनवाई
मजिस्ट्रेट जज सारा नेटबर्न ने याचिका स्वीकार करने की सिफारिश की है। इस पर अंतिम फैसला जिला न्यायाधीश एंड्रयू एल. मैरेरो करेंगे। मामले में अगली सुनवाई 15 मार्च तय की गई है।
प्रत्यर्पण और पहली पेशी
निखिल गुप्ता को जून 2024 में चेक गणराज्य से अमेरिका प्रत्यर्पित किया गया था। इसके बाद उनकी पहली पेशी मैनहट्टन स्थित संघीय अदालत में मजिस्ट्रेट जज जेम्स कॉट के समक्ष हुई थी।
पहले खुद को बताया था निर्दोष
पहली पेशी के दौरान आरोपी ने आरोपों से इनकार किया था। अमेरिकी जांच एजेंसियों के अनुरोध पर उन्हें चेक गणराज्य में हिरासत में लिया गया था और बाद में प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पूरी की गई।
किन अपराधों में कबूलनामा
न्यूयॉर्क के साउदर्न डिस्ट्रिक्ट के यूएस अटॉर्नी जे क्लेटन के अनुसार, आरोपी ने भाड़े पर हत्या की साजिश, मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश और संबंधित आपराधिक आरोपों में दोष स्वीकार किया है। इन धाराओं में अधिकतम 10 से 20 साल तक की सजा का प्रावधान है।
कैसे रची गई साजिश
चार्जशीट और कोर्ट रिकॉर्ड के मुताबिक, निखिल गुप्ता ने भारत सहित अन्य स्थानों पर मौजूद सहयोगियों के साथ मिलकर योजना बनाई। सह-आरोपी विकास यादव के निर्देश पर उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति से संपर्क किया, जिसे वे आपराधिक नेटवर्क से जुड़ा मानते थे। बाद में सामने आया कि वह व्यक्ति ड्रग एनफोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन के साथ काम करने वाला गोपनीय सूत्र था।
पैसों का सौदा और अंडरकवर ऑपरेशन
अभियोजन के अनुसार, योजना के तहत एक अंडरकवर अधिकारी को कथित तौर पर 1 लाख अमेरिकी डॉलर देने पर सहमति बनी थी। 9 जून 2023 के आसपास एडवांस के रूप में 15 हजार डॉलर नकद पहुंचाने की व्यवस्था भी की गई। इसी अंडरकवर ऑपरेशन के जरिए एजेंसियों को साजिश के ठोस सबूत मिले।
मामला क्यों अहम
यह केस अमेरिकी धरती पर लक्षित हत्या की अंतरराष्ट्रीय साजिश से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष का कहना है कि दोष स्वीकार किए जाने से नेटवर्क और साजिश की कड़ियों को जोड़ने में मदद मिलेगी, जबकि अदालत आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत सजा पर फैसला करेगी।