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अलवर में पंचायतों का नया परिसीमन जारी: 107 नई ग्राम पंचायतें बनीं, कई क्षेत्रों में उठी नाराज़गी…

अलवर। जिले में प्रशासनिक ढांचे के पुनर्गठन की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। नए जिलों में जिला परिषदों के गठन की अधिसूचना जारी होने के ठीक अगले दिन ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, पुनर्सीमांकन और नवसृजन की सूची सार्वजनिक कर दी। इसी के साथ अलवर जिले में 107 नई ग्राम पंचायतों का गठन भी अधिसूचित कर दिया गया। पहले जिले में 202 ग्राम पंचायतें थीं, जो अब बढ़कर 309 हो गई हैं।

नई अधिसूचना के सामने आते ही कई स्थानों पर असंतोष भी देखने को मिला। विशेष रूप से कुशालगढ़ और सावर गांव को इंदोक ग्राम पंचायत में शामिल करने के फैसले पर ग्रामीणों ने तीखा विरोध जताया। शुक्रवार को कुशालगढ़ तिराहे पर ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर प्रशासन से निर्णय वापस लेने की मांग की।

ग्रामीणों का कहना है कि वे इंदोक ग्राम पंचायत का हिस्सा नहीं बनना चाहते और पूर्व की भांति माधोगढ़ ग्राम पंचायत में ही रहना चाहते हैं। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि इस संबंध में वे पहले भी अधिकारियों को ज्ञापन देकर अपनी आपत्ति जता चुके हैं, लेकिन उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि राजनीतिक लाभ के लिए गांवों को विभाजित किया गया है।

ग्रामीण प्रतिनिधि नरेश मुक्कड़ ने बताया कि इंदोक को नई पंचायत बनाए जाने के बाद कुशालगढ़ और सावर को माधोगढ़ से हटाकर उसमें जोड़ दिया गया है, जबकि इंदोक गांव सात किलोमीटर दूर है और माधोगढ़ केवल चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ग्रामीणों का कहना है कि दूरी और सुविधा दोनों के लिहाज से माधोगढ़ ही उनके लिए उपयुक्त है।

रवि शर्मा, ओमप्रकाश और पंकज शर्मा सहित अन्य ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी आपत्तियों का समाधान नहीं हुआ, तो वे जिला कलेक्टर को भी ज्ञापन देंगे। इसके साथ ही उन्होंने आगामी चुनावों के बहिष्कार की भी चेतावनी दी है।

ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि तीनों गांव—कुशालगढ़, सावर और इंदोक—को पूर्ववत माधोगढ़ ग्राम पंचायत में ही रखा जाए। प्रशासन अब इन आपत्तियों पर क्या निर्णय लेता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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