नेपाल चुनाव 2026: Gen Z नेताओं और पुराने धुरंधरों की भिड़ंत
नेपाल की 275 सीटों वाली प्रतिनिधि सभा के लिए 5 मार्च 2026 को आम चुनाव होने जा रहे हैं। जनता सीधे 165 सांसदों का चुनाव करेगी, जबकि शेष 110 सांसद पार्टी सूची के जरिए चुने जाएंगे। यह चुनाव सेप्टंबर 2025 के युवाओं के भ्रष्टाचार-विरोधी Gen Z आंदोलन के बाद हो रहा पहला चुनाव है।
चुनावी मैदान में पुराने नेता
- के.पी. शर्मा ओली (73 साल) – कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल–UML के नेता, Gen Z आंदोलन के बाद भी राजनीतिक ताकत बनाए रखी।
- पुष्प कमल दहल (71 साल) – नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के प्रमुख, आंदोलन के बाद अन्य वामपंथी गुटों को पार्टी में शामिल किया।
- गगन थापा (49 साल) – नेपाली कांग्रेस का नया नेता, वरिष्ठ नेता और पूर्व पीएम शेर बहादुर देउबा (79 साल) को हाशिये पर।
- पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह (78 साल) – राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी का समर्थन, राजतंत्र और हिंदू राष्ट्र के एजेंडे के साथ।
पुराने नेताओं का चुनावी बयान:
“अगर हमारी पार्टी सत्ता में आएगी, तो नेपाल एक हिंदू राष्ट्र बनेगा।”
नए नेता और Gen Z उम्मीदवार
- रवि लामिछाने (50 साल) – टीवी होस्ट, राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के नेता, पूर्व उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री रह चुके हैं।
- बालेन शाह (35 साल) – रैपर और सिविल इंजीनियर, लामिछाने के गठबंधन से पीएम उम्मीदवार। सोशल मीडिया पर बड़ी फॉलोइंग।
- कुलमान घिसिंग – पूर्व ऊर्जा मंत्री, नेपाल विद्युत प्राधिकरण के प्रमुख, बिजली कटौती की समस्या से निपटने में लोकप्रिय।
- सुदन गुरंग – Gen Z आंदोलन में सक्रिय, युवा कार्यकर्ताओं के साथ चुनाव मैदान में।
Gen Z का एजेंडा
- रोजगार और आर्थिक सुधार।
- भ्रष्टाचार-रोधी नीतियां।
- विदेशी रेमिटेंस पर देश की निर्भरता और युवा अवसरों की वृद्धि।
नेपाल की आर्थिक पृष्ठभूमि:
- 82% वर्कफोर्स अनौपचारिक क्षेत्र में।
- प्रति व्यक्ति GDP: 1,447 डॉलर (2024)।
- प्रवासी नेपाली देश की 7.5% आबादी, GDP का लगभग 1/3 रेमिटेंस पर निर्भर।
चुनाव की खास बातें
- पहला चुनाव जो Gen Z आंदोलनों के बाद हो रहा है।
- युवा मतदाता नई उम्मीद और आर्थिक सुधार के एजेंडे के पीछे हैं।
- पुराने नेता राजतंत्र और हिंदू राष्ट्र की वकालत कर रहे हैं।
नेपाल का यह चुनाव पुराने और नए नेताओं के बीच राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक संघर्ष का प्रतीक माना जा रहा है।