रेप केस में दोषी नारायण साई को राहत की उम्मीद? गुजरात हाईकोर्ट ने सजा निलंबन याचिका पर जारी किया नोटिस…..
रेप केस में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम के बेटे नारायण साई को लेकर एक बार फिर न्यायिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। गुजरात हाईकोर्ट ने नारायण साई द्वारा दायर सजा निलंबन की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। यह मामला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि हाल ही में हाईकोर्ट ने आसाराम की सजा को अस्थायी रूप से निलंबित किया था।
गुजरात हाईकोर्ट ने सजा निलंबन याचिका पर मांगा जवाब
गुजरात हाईकोर्ट ने वर्ष 2019 के रेप केस में दोषी करार दिए गए नारायण साई की सजा को निलंबित करने की याचिका पर संज्ञान लिया है। अदालत ने इस याचिका पर नोटिस जारी करते हुए राज्य सरकार को अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं। अब अगली सुनवाई में सरकार की प्रतिक्रिया के बाद मामले की आगे की दिशा तय होगी।
2019 में सुनाई गई थी उम्रकैद की सजा
नारायण साई को वर्ष 2019 में सूरत की विशेष अदालत ने दो बहनों के साथ दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अदालत ने इसे गंभीर अपराध मानते हुए कठोर सजा दी थी। इसके बाद से नारायण साई जेल में सजा काट रहा है।
आसाराम को पहले मिल चुकी है अस्थायी राहत
इस मामले को लेकर चर्चा इसलिए भी तेज है क्योंकि बीते साल नवंबर में गुजरात हाईकोर्ट ने नारायण साई के पिता और स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम की सजा को छह महीने के लिए निलंबित कर दिया था। आसाराम को यह राहत स्वास्थ्य कारणों के आधार पर दी गई थी, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए बाहर जाने की अनुमति मिली थी।
क्या नारायण साई को भी मिलेगी राहत?
नारायण साई की ओर से दायर याचिका में सजा को अस्थायी रूप से निलंबित करने की मांग की गई है। याचिका में किन आधारों पर राहत मांगी गई है, इसका खुलासा फिलहाल नहीं हुआ है। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला संवेदनशील होने के साथ-साथ सामाजिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है।
हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें
अब इस मामले में सबकी नजरें गुजरात हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं। अदालत राज्य सरकार के जवाब और याचिकाकर्ता के तर्कों को सुनने के बाद यह तय करेगी कि नारायण साई की सजा निलंबित की जाए या नहीं।
सामाजिक और कानूनी दृष्टि से अहम मामला
यह केस न केवल कानून बल्कि समाज के लिए भी एक बड़ा संदेश माना जाता रहा है। ऐसे में सजा निलंबन को लेकर अदालत का फैसला आने वाले समय में महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।