एक साथ उठीं पांच अर्थियां: गांव नगला भोजराज में मातम का सैलाब , गांव पहुंचते ही टूट पड़ा दर्द
तीन बच्चों, पत्नी की हत्या के बाद खुदकुशी करने वाले बेल्डिंग व्यवसायी सत्यवीर के परिवार के पांच सदस्यों के शव जब पोस्टमार्टम के बाद गांव नगला भोजराज पहुंचे, तो पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। देर रात शवों के पहुंचते ही हर तरफ चीख-पुकार मच गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण अंतिम दर्शन के लिए जुट गए।
घर से एक साथ निकली पांचों की शव यात्रा
शवों को पहले सत्यवीर के घर ले जाया गया। इसके बाद एक साथ पांच अर्थियां उठाई गईं। गांव की गलियों से गुजरती शव यात्रा में हर उम्र के लोग शामिल रहे। “राम नाम सत्य” के जयघोष के बीच वातावरण पूरी तरह गमगीन नजर आया।
पिता ने बेटे और पोते-पोतियों को दिया कांधा
करीब 70 वर्षीय सत्यवीर के पिता नेमसिंह भी शव यात्रा में शामिल रहे। वे अपने बेटे, बहू और तीनों बच्चों की अर्थियां उठाने वालों के साथ चलते नजर आए। यह दृश्य देख मौजूद लोगों की आंखें भर आईं।
एक गड्ढे में तीनों बच्चों का दफन
परिवार की इच्छा के अनुसार सत्यवीर के खेत में तीनों बच्चों — प्राची, आकांक्षा और गिरीश — को एक ही गड्ढे में दफनाया गया। जेसीबी मशीन से गहरा गड्ढा खुदवाया गया, जिसमें तीनों बच्चों के शव रखकर मिट्टी से ढक दिया गया।
पति-पत्नी का एक ही चिता पर अंतिम संस्कार
तीनों बच्चों के दफन के बाद उसी स्थान के पास सत्यवीर और उनकी पत्नी शीला उर्फ रामश्री का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया। सत्यवीर के छोटे भाई देशराज ने दोनों को मुखाग्नि दी।
खेत बना अंतिम विदाई का गवाह
अंत्येष्टि स्थल गांव से लगभग आधा किलोमीटर दूर सत्यवीर का खेत था, जहां इस समय गेहूं की फसल खड़ी है। सुबह करीब 9:30 बजे शवों को खेत पर लाया गया और 11 बजे अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी हुई।
बड़ी संख्या में ग्रामीण और महिलाएं रहीं मौजूद
अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में ग्रामीणों के साथ महिलाएं भी पहुंचीं। खेत तक जाने वाले रास्ते पर लोगों की लंबी कतारें नजर आईं। पूरे गांव में शोक का माहौल बना रहा।
जनप्रतिनिधियों ने दी श्रद्धांजलि
इस दुखद मौके पर देवेश शाक्य, हरिओम वर्मा, ममतेश शाक्य और ब्रजेश वर्मा सहित क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधि और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता मौजूद रहे। सभी ने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।