25 हजार करोड़ के MSCB घोटाले में सुनेत्रा पवार पर कानूनी शिकंजा, EOW से क्लीनचिट के बावजूद ED जांच जारीमुंबई | राजनीति और जांच एजेंसियों के बीच फंसा हाई-प्रोफाइल मामला
महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक (MSCB) से जुड़े करीब 25,000 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में दिवंगत अजित पवार की पत्नी और महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बनीं सुनेत्रा पवार का नाम एक बार फिर चर्चा में है।
हालांकि मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने उन्हें क्लीनचिट दे दी है, लेकिन प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले को बंद करने पर आपत्ति जताई है। यह मामला फिलहाल अदालत में लंबित है।
ED की चार्जशीट में नाम, EOW से राहत लेकिन जांच खत्म नहीं
इस प्रकरण में ED ने अपने आरोपपत्र में अजित पवार के साथ सुनेत्रा पवार का भी नाम शामिल किया था।
2019 में बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देश पर दर्ज FIR के आधार पर यह जांच शुरू हुई थी।
हालांकि EOW की जांच में दंपति को राहत मिली, लेकिन ED ने इसे स्वीकार नहीं किया और मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच जारी रखी।
आयकर विभाग की बेनामी जांच और 1,000 करोड़ की संपत्ति जब्ती
आयकर विभाग ने बेनामी संपत्ति कानून के तहत सुनेत्रा पवार और अजित पवार की जांच की थी।
इस दौरान करीब 1,000 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से जब्त की गईं।
हालांकि न्यायनिर्णय प्राधिकरण और बाद में अपीलीय न्यायाधिकरण ने दंपति को राहत देते हुए कहा कि
“संपत्ति के भुगतान के ठोस सबूत नहीं मिलने के कारण उन्हें वास्तविक मालिक नहीं माना जा सकता।”
31 जिला सहकारी बैंकों से जुड़ा संवेदनशील मामला
MSCB घोटाला महाराष्ट्र के सबसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामलों में गिना जाता है।
यह मामला बैंक के अंतर्गत आने वाले 31 जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों से जुड़ा है, जिनमें से कई के प्रमुख प्रभावशाली राजनेता थे।
आरोप है कि इन बैंकों ने नियमों को दरकिनार कर सहकारी चीनी मिलों को बड़े पैमाने पर ऋण दिए।
2002 से 2017 तक डिफॉल्ट, फिर सस्ते दामों पर नीलामी
जांच एजेंसियों के अनुसार,
2002 से 2017 के बीच कई चीनी मिलें ऋण चुकाने में विफल रहीं
इससे MSCB को करीब 25,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ
बाद में वसूली के नाम पर मिलों और जमीनों की नीलामी बेहद कम कीमतों पर की गई
आरोप है कि इनमें से कई संपत्तियां बैंक अधिकारियों के रिश्तेदारों को मिलीं
जारंदेश्वर शुगर मिल सौदा बना जांच का केंद्र
ED की जांच में जारंदेश्वर शुगर कोऑपरेटिव मिल का सौदा खास तौर पर सामने आया।
एजेंसी के अनुसार:
2010 में MSCB ने यह मिल 65.7 करोड़ रुपये में गुरु कमोडिटी प्राइवेट लिमिटेड को बेची
इसके तुरंत बाद मिल को 12 लाख रुपये सालाना किराये पर जारंदेश्वर शुगर को दे दिया गया
जारंदेश्वर शुगर के निदेशक राजेंद्र घड़गे, अजित पवार के मामा बताए जाते हैं
नीलामी के लिए इस्तेमाल धन का एक हिस्सा जय एग्रोटेक प्राइवेट लिमिटेड से आया, जिसमें सुनेत्रा पवार निदेशक थीं
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से फिर खुल सकता है मामला?
सामाजिक कार्यकर्ता अंजली दमानिया ने आयकर विभाग के पुराने निष्कर्षों को चुनौती दी है।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने गणपति डीलकॉम केस में बेनामी कानून को पूर्वव्यापी रूप से लागू करने वाले अपने पुराने आदेश को वापस ले लिया है।
इसी आधार पर पहले जिन संपत्तियों को मुक्त किया गया था, उन्हें दोबारा जब्त करने की मांग की गई है।
राजनीतिक घटनाक्रम और जांच का टाइमलाइन कनेक्शन
यह मामला उस समय और संवेदनशील हो गया जब अजित पवार एनसीपी से अलग होकर बीजेपी-शिंदे गुट की सरकार में शामिल हुए।
इसके बाद से ही MSCB घोटाले की जांच और राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच संबंधों पर सवाल उठते रहे हैं।