पहाड़ी पर आग, समय रहते बुझी; वन विभाग व स्कूल स्टाफ की सूझबूझ से टला बड़ा संकट…
अचानक भड़की आग से मचा हड़कंप
सकट क्षेत्र के ग्राम मोतीवाड़ा प्लांटेशन स्थित पहाड़ी पर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब अचानक आग की लपटें उठती दिखाई दीं। गर्म और शुष्क मौसम के कारण आग तेजी से फैलने की आशंका बनी हुई थी, जिससे आसपास के ग्रामीण चिंतित हो गए।
ग्रामीणों की सतर्कता से मिली समय पर सूचना
आग को देखते ही स्थानीय ग्रामीणों ने बिना देर किए वन विभाग को सूचना दी। उनकी तत्परता ने हालात को बिगड़ने से पहले ही प्रशासन तक पहुंचा दिया, जो इस पूरे घटनाक्रम की सबसे अहम कड़ी साबित हुई।
वन विभाग की टीम ने संभाला मोर्चा
सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। वनपाल महेंद्र मीना और यशवंत सिंह के नेतृत्व में सहायक वनपाल राकेश यादव व दिलीप चौहान, वन रक्षक हरिश तिवाड़ी, पवन मीना और मनोहर लाल पांडे ने आग पर नियंत्रण के लिए अभियान शुरू किया।
सुरक्षा गार्डों की अहम भूमिका
आग बुझाने के अभियान में विभागीय सुरक्षा गार्ड हरिसिंह, कैलाश, राजेश, राजू, दुर्गादान और जीतू ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। सभी ने मिलकर फायर लाइन बनाते हुए आग को आगे फैलने से रोक दिया।
स्कूल स्टाफ और बच्चों ने दिखाया साहस
राजकीय माध्यमिक विद्यालय मोतीवाड़ा के स्टाफ और स्कूली बच्चे भी सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे। उन्होंने वन कर्मियों के साथ मिलकर आग बुझाने में सहयोग किया, जो सामाजिक जिम्मेदारी और साहस का प्रेरणादायक उदाहरण रहा।
संयुक्त प्रयासों से आग पर पूरी तरह काबू
लगातार मशक्कत के बाद सभी के संयुक्त प्रयासों से आग पर पूरी तरह नियंत्रण पा लिया गया। राहत की बात यह रही कि समय रहते आग देख ली गई, जिससे वन संपदा, वन्यजीव और आसपास के क्षेत्र को बड़ा नुकसान होने से बचा लिया गया।
संभावित नुकसान टलने से विभाग ने जताया आभार
वन विभाग ने विद्यालय स्टाफ और विद्यार्थियों की सराहना करते हुए उनका आभार व्यक्त किया। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यदि कुछ देर की भी चूक होती, तो आग विकराल रूप ले सकती थी।
विश्लेषण: सामूहिक जिम्मेदारी से टली बड़ी दुर्घटना
यह घटना साबित करती है कि आपदा के समय प्रशासन, स्थानीय नागरिकों और शिक्षण संस्थानों का आपसी सहयोग कितनी बड़ी दुर्घटना को टाल सकता है। साथ ही यह भी संकेत देती है कि गर्मी के मौसम में वन क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बेहद जरूरी है।