मनरेगा का नाम बदलना गरीबों और गांधी के विचारों का अपमान: टीकाराम जूली…..
अलवर में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदलने के प्रस्ताव को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। केंद्र सरकार के इस फैसले के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी अलवर के आह्वान पर सोमवार को मिनी सचिवालय परिसर में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और फैसले को गरीब विरोधी बताया।
मिनी सचिवालय पर कांग्रेस का धरना
सोमवार को अलवर के मिनी सचिवालय परिसर में कांग्रेस पार्टी ने संगठित होकर धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता, पदाधिकारी और समर्थक मौजूद रहे। प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा, लेकिन संदेश स्पष्ट था—मनरेगा के नाम से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ स्वीकार नहीं की जाएगी।
टीकाराम जूली का केंद्र सरकार पर तीखा हमला
धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने मोदी–शाह सरकार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि मनरेगा कोई साधारण सरकारी योजना नहीं, बल्कि देश के गरीब, मजदूर और ग्रामीण वर्ग की जीवनरेखा है। इस योजना का नाम बदलना महात्मा गांधी के योगदान और उनके विचारों का सीधा अपमान है।
ग्रामीण गरीबों की रीढ़ है मनरेगा
टीकाराम जूली ने कहा कि मनरेगा ने ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी से जूझ रहे लाखों परिवारों को सम्मानजनक रोजगार दिया है। यह योजना केवल रोजगार ही नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा का मजबूत आधार भी है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ऐसी योजनाओं की आत्मा को कमजोर करने का प्रयास कर रही है।
🧠 हेडलाइन: नाम बदलना केवल प्रशासनिक नहीं, वैचारिक फैसला
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मनरेगा के नाम में बदलाव को केवल प्रशासनिक निर्णय बताना गलत है। यह एक सोची-समझी वैचारिक रणनीति है, जिसके जरिए देश के इतिहास और महात्मा गांधी की विचारधारा को धीरे-धीरे हाशिये पर डालने की कोशिश की जा रही है।
कांग्रेस का ऐलान—विरोध जारी रहेगा
टीकाराम जूली ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी जनहित से जुड़ी योजनाओं के साथ राजनीति नहीं होने देगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस फैसले के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेगी और जरूरत पड़ी तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
कार्यकर्ताओं ने लगाए नारे
धरना स्थल पर मौजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए और मनरेगा के मूल नाम को बनाए रखने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने कहा कि गरीबों के अधिकारों से खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
राजनीतिक संकेत और आगे की राह
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मनरेगा के नाम को लेकर उठा विवाद आने वाले समय में और तूल पकड़ सकता है। ग्रामीण और मजदूर वर्ग से जुड़ा यह मुद्दा केंद्र और विपक्ष के बीच वैचारिक टकराव को और गहरा कर सकता है।