मिडिल ईस्ट में नया भू-राजनीतिक मोड़: क्या बदलने वाली हैं सीमाएं? अमेरिकी बयान से अरब जगत में चिंता
इज़राइल में तैनात अमेरिकी राजदूत के हालिया बयान के बाद अरब देशों में असंतोष तेज़ हो गया है। कई मुस्लिम देशों का मानना है कि अमेरिका की पश्चिम एशिया नीति क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित कर सकती है। खासतौर पर इज़राइल की सुरक्षा के नाम पर भविष्य में क्षेत्रीय सीमाओं में बदलाव की आशंका को लेकर चिंता जताई जा रही है।
ईरान को लेकर बढ़ी आशंकाएं
अरब देशों को आशंका है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच टकराव बढ़ता है और ईरान कमजोर पड़ता है, तो पश्चिम एशिया में शक्ति संतुलन बदल सकता है। इससे क्षेत्रीय राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं और इज़राइल की रणनीतिक स्थिति और मजबूत हो सकती है।
मुस्लिम देशों के संगठन अमेरिका के खिलाफ मुखर
इस मुद्दे पर ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन, अरब लीग और गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल जैसे संगठनों ने एकजुट रुख अपनाया है। इन संगठनों का कहना है कि क्षेत्रीय सीमाओं से छेड़छाड़ को स्वीकार नहीं किया जाएगा और संप्रभुता उनकी ‘रेड लाइन’ है।
इतिहास में कैसे बदला मध्य-पूर्व का नक्शा
- पश्चिम एशिया का नक्शा पिछले एक सदी में कई बार बदला है।
- 1917 के दौर में फिलिस्तीन ब्रिटिश शासन के अधीन था और वहां यहूदी बस्तियां सीमित थीं।
- 1947 में संयुक्त राष्ट्र ने विभाजन योजना पेश की।
- 1948 में इज़राइल के गठन के बाद युद्ध हुआ और सीमाएं बदलीं।
- 1967 के युद्ध के बाद गाज़ा, वेस्ट बैंक, पूर्वी यरुशलम और गोलान हाइट्स जैसे क्षेत्रों पर इज़राइल का नियंत्रण बढ़ा।
- 1990 के दशक में हुए ओस्लो समझौते के तहत वेस्ट बैंक को प्रशासनिक क्षेत्रों में बांटा गया।
‘ग्रेटर इज़राइल’ बहस से बढ़ी बेचैनी
अमेरिकी राजदूत के एक बयान के बाद ‘ग्रेटर इज़राइल’ जैसी अवधारणाओं को लेकर बहस तेज़ हुई है। अरब देशों का मानना है कि इस तरह की सोच क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बन सकती है। फिलहाल यह राजनीतिक और वैचारिक बहस का विषय है, लेकिन इसे लेकर आशंकाएं बनी हुई हैं।
अमेरिका की सैन्य रणनीति पर चर्चा
अमेरिकी रणनीति को लेकर यह चर्चा है कि किसी संभावित संघर्ष की स्थिति में अरब देशों की भूमि या हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल न किया जाए। रिपोर्टों के अनुसार, यूरोप के कुछ देशों — जैसे बुल्गारिया, ग्रीस और साइप्रस — से अमेरिकी लड़ाकू विमानों की तैनाती की संभावनाओं पर रणनीतिक विश्लेषण किया जा रहा है। हालांकि, किसी आधिकारिक सैन्य कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है।
क्या वाकई बदलेगा मिडिल ईस्ट का नक्शा?
विशेषज्ञों के अनुसार, मध्य-पूर्व में सीमाओं का बदलना बेहद जटिल और संवेदनशील मुद्दा है। क्षेत्रीय संतुलन केवल सैन्य शक्ति से नहीं, बल्कि कूटनीति, अंतरराष्ट्रीय कानून और वैश्विक दबावों से तय होता है। फिलहाल यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि ईरान से जुड़े घटनाक्रम के बाद पूरे क्षेत्र का नक्शा बदल जाएगा, लेकिन हालात पर दुनिया की नजर टिकी हुई है।