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महबूबा मुफ्ती का केंद्र पर निशाना: “दिल्ली धमाके के आरोपियों के घर गिराना अन्याय, निर्दोषों को क्यों सज़ा?”

दिल्ली विस्फोट मामले में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने आरोपियों के घरों को गिराने की कार्रवाई पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई ज़रूरी है, लेकिन सामूहिक सज़ा और बेगुनाह लोगों को परेशान करना कानून और इंसाफ़ के खिलाफ है।

“सजा केवल दोषियों को मिले, निर्दोषों को नहीं” — मुफ्ती

महबूबा मुफ्ती ने कहा कि किसी भी व्यक्ति का घर गिराना तभी उचित है जब वह अदालत द्वारा दोषी ठहराया गया हो। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना जांच पूरी किए ऐसे कदम उठाने से जनता में डर और असुरक्षा की भावना बढ़ती है।

यह बयान सरकार की तत्काल कार्रवाई वाली नीति पर सवाल उठाता है और न्यायिक प्रक्रिया के महत्व को रेखांकित करता है।

पुलिस की सामूहिक गिरफ्तारियों से बढ़ रहा भय

उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली विस्फोट मामले के बाद स्थानीय लोगों को बिना पर्याप्त आधार गिरफ्तार किया गया, जिसकी वजह से आम नागरिकों में डर का माहौल बन गया है।

कई मानवाधिकार संगठनों ने भी बार-बार कहा है कि सामूहिक गिरफ्तारी से समुदायों में अविश्वास पैदा होता है और जांच की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।

“घर गिराने से आतंकवाद खत्म नहीं होता”

मुफ्ती ने कहा कि आतंकियों के घरों को तोड़ना समाधान नहीं है। इससे आतंकवाद नहीं रुकता बल्कि लोगों के भीतर नाराज़गी और असंतोष बढ़ता है।

यह तर्क कश्मीर और अन्य संवेदनशील इलाक़ों में लंबे समय से चल रही बहस का हिस्सा है, जहां ऐसी कार्रवाइयों को प्रतिकूल प्रभाव वाला माना जाता है।

जनता के भरोसे को कमजोर करने वाला कदम

उन्होंने कहा कि इस तरह के कदम सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के प्रति जनता के भरोसे को नुकसान पहुंचाते हैं। “जब निर्दोष प्रभावित होते हैं, तो सबसे पहले जनता का विश्वास टूटता है,” उन्होंने कहा।

लोकतांत्रिक ढांचे में पुलिस और प्रशासन पर जनता का विश्वास महत्वपूर्ण स्तंभ होता है—ऐसे बयान उसके कमजोर होने के संकेत हैं।

जांच को पारदर्शी और न्यायसंगत बनाने की मांग

मुफ्ती ने सरकार से अपील की कि विस्फोट मामले में पारदर्शी, निष्पक्ष और प्रमाण आधारित जांच हो। उन्होंने कहा कि न्याय तभी संभव है जब प्रक्रिया सबके लिए बराबर और निष्पक्ष हो।

बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच यह मांग प्रशासन को मामले की जांच में और अधिक सावधानी बरतने की दिशा में प्रेरित कर सकती है।

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