भरे मंच पर फफक पड़े डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, संघर्ष के दिनों को याद कर छलके आंसू
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक का एक बेहद भावुक और मानवीय रूप मेरठ में देखने को मिला। आमतौर पर सियासी मंचों पर मुखर और आक्रामक नजर आने वाले डिप्टी सीएम नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती की पूर्व संध्या पर आयोजित कार्यक्रम में अपने जीवन के संघर्षों को याद कर खुद को संभाल नहीं पाए और मंच पर ही रो पड़े। इस पल का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
नेताजी की जयंती पर बदला सियासी मंच का माहौल
मेरठ में आयोजित कवि सम्मेलन और सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान जैसे ही ब्रजेश पाठक ने अपना संबोधन शुरू किया, माहौल गंभीर हो गया। उन्होंने राजनीति से इतर अपने निजी जीवन की पीड़ा साझा की, जिसने मंच पर मौजूद नेताओं और सामने बैठे श्रोताओं को भावुक कर दिया।
अभावों में बीता बचपन, आंखों से नहीं रुके आंसू
डिप्टी सीएम ने बताया कि उनका जीवन अभावों और कठिन संघर्षों के बीच गुजरा। भावुक होते हुए उन्होंने कहा, “कभी सर्दी में पहनने के लिए जूते नहीं होते थे तो कभी पैरों में डालने के लिए चप्पल नहीं मिलती थी।” ये शब्द कहते-कहते उनकी आंखों से आंसू बहने लगे और पूरा सभागार कुछ देर के लिए शांत हो गया।
गरीबों को देखकर क्यों भर आता है मन
अपने अतीत को याद करते हुए ब्रजेश पाठक ने कहा कि जब भी वह सड़क पर किसी गरीब या मजबूर व्यक्ति को परेशान देखते हैं, तो उनका दिल दुखी हो जाता है। उन्होंने कहा, “मैंने गरीबी को किताबों में नहीं पढ़ा, बल्कि खुद जिया है। इसलिए किसी का दर्द देखकर खुद को रोक नहीं पाता।”
बाबा साहेब में दिखी पिता की छवि
डिप्टी सीएम ने भावुक लहजे में यह भी बताया कि जब उनके पिता जीवित नहीं थे, तब उन्होंने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों को गहराई से समझा। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब के सिद्धांतों में उन्हें अपने पिता की छवि दिखाई दी और उन्होंने उन्हें ही अपना मार्गदर्शक और पिता समान माना।
खुद को बताया गरीबों का सेवक
अपने संबोधन के दौरान ब्रजेश पाठक ने कहा कि आज जिस मुकाम पर वह पहुंचे हैं, वहां तक का सफर आसान नहीं था। उन्होंने खुद को ‘गरीबों का सेवक’ बताते हुए कहा कि जनता की समस्याएं सुनना और उनके बीच रहना उनकी प्राथमिकता है, क्योंकि वे दर्द और संघर्ष की कीमत जानते हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ भावुक पल
कार्यक्रम के दौरान ब्रजेश पाठक के रोने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग इस वीडियो को उनके संघर्ष और जमीन से जुड़े नेता होने की मिसाल के तौर पर देख रहे हैं।
मेरठ का यह मंच सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह उस संघर्ष की कहानी बन गया जिसने एक साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर सत्ता के शिखर तक पहुंचने वाले नेता के संवेदनशील पक्ष को सामने रखा।