ममता कुलकर्णी ने किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर पद से दिया इस्तीफा, जानिए क्या है असली वजह…
नई दिल्ली। पूर्व बॉलीवुड अभिनेत्री ममता कुलकर्णी ने किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय उन्होंने अपनी स्वतंत्र इच्छा और पूरी समझदारी के साथ लिया है। उनका इस्तीफा 27 जनवरी 2026 से प्रभावी माना जाएगा।
ममता कुलकर्णी ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में कहा कि उनका यह कदम किसी भी तरह के विवाद, मतभेद या आंतरिक टकराव से जुड़ा नहीं है। उन्होंने साफ किया कि यह फैसला उनके निजी आध्यात्मिक सफर का हिस्सा है।
लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के खिलाफ नहीं कोई शिकायत
ममता कुलकर्णी ने अपने संदेश में किन्नर अखाड़े की प्रमुख डॉ. आचार्य लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के प्रति सम्मान जताया। उन्होंने कहा कि उनके बीच किसी तरह की नाराजगी या मतभेद नहीं हैं।
उन्होंने लिखा कि उन्हें महामंडलेश्वर पद और सम्मान देने के लिए वह आभार व्यक्त करती हैं और इस फैसले के पीछे कोई व्यक्तिगत टकराव नहीं है।
‘सत्य को पद या वस्त्र की जरूरत नहीं’
अपने आध्यात्मिक दृष्टिकोण को साझा करते हुए ममता कुलकर्णी ने कहा कि अब उनकी सोच उन्हें एक अलग दिशा में ले जा रही है। उन्होंने प्रसिद्ध दार्शनिक जे. कृष्णमूर्ति के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि सत्य को किसी पद, वस्त्र या पहचान की आवश्यकता नहीं होती।
उन्होंने यह भी बताया कि उनके गुरु श्री चैतन्य गंगागिरी नाथ ने भी कभी किसी औपचारिक उपाधि को स्वीकार नहीं किया था, जिससे उन्हें इस फैसले के लिए प्रेरणा मिली।
बिना पद के जारी रखेंगी साधना
ममता कुलकर्णी ने कहा कि वह आगे भी अपना आध्यात्मिक जीवन जारी रखेंगी, लेकिन अब बिना किसी आधिकारिक पद, संगठन या पहचान के।
उन्होंने कहा कि वह पिछले 25 वर्षों से सन्यासी जीवन जी रही हैं और आगे भी चुपचाप साधना करती रहेंगी। जहां आवश्यकता होगी, वहां अपने अनुभव और ज्ञान को साझा करेंगी, लेकिन किसी विशेष समूह या पद से जुड़कर नहीं।
क्यों अहम है यह फैसला?
इस फैसले को ममता कुलकर्णी के आध्यात्मिक जीवन में एक नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है, जहां वह औपचारिक धार्मिक पदों से दूरी बनाकर व्यक्तिगत साधना और आत्मिक स्वतंत्रता को प्राथमिकता दे रही हैं।