ED रेड के बीच TMC ऑफिस पहुंचीं ममता बनर्जी, बोलीं – ‘पार्टी का डेटा उठाना लोकतंत्र पर हमला’
कोलकाता में फर्जी सरकारी नौकरी घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद उस जगह पहुंच गईं, जहां कार्रवाई चल रही थी। उन्होंने केंद्र सरकार और ईडी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी पार्टी के दस्तावेज, हार्ड डिस्क और रणनीतिक डेटा जब्त किया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सीधा हमला है।
📌 रेड के बीच सीधे मौके पर पहुंचीं मुख्यमंत्री
“कार्रवाई स्थल पर ममता की एंट्री, केंद्र पर खुला हमला”
ईडी की टीम जब कथित फर्जी सरकारी नौकरी घोटाले में कोलकाता सहित 15 ठिकानों पर छापेमारी कर रही थी, उसी दौरान ममता बनर्जी IPAC से जुड़े सेक्टर-5 स्थित TMC कार्यालय पहुंच गईं। मौके पर मौजूद अधिकारियों से उन्होंने सवाल किया कि जांच के नाम पर किसी राजनीतिक पार्टी के आंतरिक दस्तावेज कैसे उठाए जा सकते हैं।
📌 दस्तावेज और डेटा जब्त करने पर कड़ा एतराज़
“पार्टी की रणनीति जब्त करना ED की ड्यूटी नहीं”
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि एजेंसी ने पार्टी की हार्ड डिस्क, उम्मीदवारों की सूची और रणनीतिक प्लान से जुड़ी फाइलें अपने कब्जे में ले ली हैं। ममता ने सवाल उठाया कि क्या किसी जांच एजेंसी को किसी राजनीतिक दल की आंतरिक रणनीति और संगठनात्मक डेटा लेने का अधिकार है।
📌 ‘अगर हम BJP ऑफिस में जाएं तो?’
“ममता का पलटवार: बीजेपी के साथ ऐसा होता तो क्या होता?”
ममता बनर्जी ने तीखे शब्दों में कहा कि अगर वह खुद बीजेपी के किसी कार्यालय में इसी तरह छापा मारें तो देश में क्या प्रतिक्रिया होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार संवैधानिक संस्थाओं का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए कर रही है।
📌 चुनाव से पहले वोटर लिस्ट पर भी सवाल
“SIR के ज़रिए वोटर डिलीट करने का आरोप”
सीएम ने यह भी दावा किया कि चुनाव को देखते हुए राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के नाम पर वोटर लिस्ट से नाम हटाए जा रहे हैं। उन्होंने इसे लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश बताया और कहा कि यह पूरी प्रक्रिया राजनीतिक लाभ के लिए की जा रही है।
📌 ED की कार्रवाई का संदर्भ
“फर्जी नौकरी घोटाले में 15 ठिकानों पर छापेमारी”
ईडी की यह कार्रवाई कथित फर्जी सरकारी नियुक्तियों से जुड़े मामले में चल रही है। एजेंसी का कहना है कि यह आर्थिक अनियमितताओं की जांच का हिस्सा है, जबकि तृणमूल कांग्रेस इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दे रही है।
🔎 क्या यह जांच बनाम राजनीति की टकराहट है?
“कानूनी कार्रवाई या राजनीतिक टकराव?”
ममता बनर्जी का सीधे छापेमारी स्थल पर पहुंचना दिखाता है कि यह मामला केवल कानूनी नहीं रह गया है, बल्कि पूरी तरह राजनीतिक रूप ले चुका है। एक ओर केंद्रीय एजेंसियां इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई बता रही हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे विपक्षी दलों को डराने की रणनीति बता रहा है। चुनावी माहौल में यह टकराव आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।