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राजस्थान में पंचायती राज की बड़ी फेरबदल: सभी 41 जिलों में नई पंचायतों का गठन, बदला पूरा प्रशासनिक ढांचा….

राजस्थान सरकार ने 21 नवंबर 2025 को प्रदेश के सभी 41 जिलों में पंचायतों के पुनर्गठन की अधिसूचना जारी कर दी। इसके साथ ही राज्य में पंचायती राज व्यवस्था का नक्शा बदल गया है। बाड़मेर में 270 और जोधपुर में 241 नई पंचायतों के गठन के साथ ग्रामीण प्रशासन और स्थानीय राजनीति में बड़ा बदलाव आने जा रहा है।

41 जिलों में एक साथ जारी पुनर्गठन अधिसूचना

कई महीनों से चल रही प्रक्रिया के बाद ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने अंततः पूरे प्रदेश में ग्राम पंचायतों के पुनर्सीमांकन और नवसृजन की अधिसूचना जारी कर दी। यह कदम राजस्थान में स्थानीय शासन की संरचना को नए सिरे से परिभाषित करेगा।

रेगिस्तानी जिलों को मिली अधिक छूट, पंचायतों की संख्या में बड़ा इजाफा

बाड़मेर, जैसलमेर, फलोदी और चूरू जैसे रेगिस्तानी जिलों को विशेष मापदंडों के तहत छूट दी गई, जिसके परिणामस्वरूप इन इलाकों में सर्वाधिक नई पंचायतें बनीं। विशाल भूभाग और बिखरी आबादी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इन जिलों में पंचायतों की संख्या बढ़ाने का फैसला किया।

मुख्य जिलों में निर्मित हुईं कितनी नई पंचायतें — एक विस्तृत सूची

बाड़मेर: 12 पंचायत समितियों और बायतु क्षेत्र में 270 नई पंचायतें

जोधपुर: 241 नई पंचायतें, अब कुल संख्या – 527 पंचायतें

दौसा: 85 नई पंचायतें

अजमेर: 84 नई पंचायतें

जैसलमेर: 51 नई पंचायतें

उदयपुर: पुनर्गठन के बाद कुल 349 पंचायतें

ग्रामीण राजनीति में नया समीकरण, चुनाव होंगे नई सीमाओं पर आधारित

नई पंचायतों के गठन से सरपंच, उपसरपंच और पंच पदों की संख्या बढ़ेगी। अगला पंचायत चुनाव इन्हीं नई सीमाओं के आधार पर होगा। इससे कई क्षेत्रों में राजनीतिक शक्तिसंतुलन बदल सकता है और स्थानीय नेतृत्व को नए अवसर मिलेंगे।

जनता को मिलेगा सीधा लाभ: अब पंचायत कार्यालय घर के नजदीक

पहले कई पंचायतों में तीन–चार गांव शामिल होने से ग्रामीणों को मुख्यालय तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। नई पंचायतें बनने से अब लोगों को राशन कार्ड, दस्तावेज, पेंशन और प्रमाण पत्र जैसी सेवाएं अपने गांव या उसके पास ही उपलब्ध होंगी।

सरकारी नौकरियों में बढ़ोतरी: पंचायत सचिव से लेकर पटवारी तक नए पद

नई पंचायतें बनने के साथ राज्य में प्रशासनिक पदों की संख्या भी बढ़ेगी।
ग्राम सचिव, पंचायत सहायक, पटवारी जैसे पदों पर भर्ती की जरूरत बढ़ेगी, जिससे युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर खुलेंगे। यह कदम ग्रामीण विकास को गति देने के साथ बेरोजगारों के लिए भी राहत साबित हो सकता है।

प्रशासनिक सुगमता और राजनीतिक पुनर्संतुलन की ओर बड़ा कदम

राजस्थान सरकार के इस निर्णय से राज्य की ग्राम पंचायत संरचना पूरी तरह बदल गई है। जहां जनता को आसान प्रशासनिक सेवाएं मिलेंगी, वहीं भविष्य की ग्रामीण राजनीति और विकास योजनाओं पर इसका दूरगामी प्रभाव पड़ेगा।

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