माचाड़ी में कृषि महाविद्यालय को लेकर जनआंदोलन, शांतिपूर्ण बंद के बाद मिला आश्वासन…
अलवर जिले के राजगढ़ क्षेत्र में स्थित रैणी उपखंड के माचाड़ी कस्बे में स्वीकृत कृषि महाविद्यालय को यथावत माचाड़ी में रखने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। इसी मांग को लेकर माचाड़ी संघर्ष समिति के आह्वान पर कस्बा पूरी तरह शांतिपूर्ण बंद रहा। ग्रामीणों और संघर्ष समिति के सदस्यों ने एकजुट होकर अपनी नाराजगी जाहिर की और प्रशासन तक अपनी आवाज पहुंचाई।
कृषि महाविद्यालय स्थानांतरण के विरोध में बंद रहा कस्बा
सुबह से ही माचाड़ी कस्बे के बाजार बंद रहे। ग्रामीणों ने मुख्य बाजार से शांतिपूर्ण जुलूस निकाला, जो रैणी तिराहे पर पहुंचकर धरना-प्रदर्शन में तब्दील हो गया। प्रदर्शन के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय घटना सामने नहीं आई और आंदोलन पूरी तरह अनुशासित रहा।
संघर्ष समिति और ग्रामीणों ने रैणी तिराहे पर जताया विरोध
धरने में बड़ी संख्या में ग्रामीण, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कहा कि कृषि महाविद्यालय माचाड़ी की जरूरत है, क्योंकि यह क्षेत्र कृषि प्रधान है और इससे स्थानीय युवाओं को शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे।
भाजपा नेता बन्नाराम मीना ने दिया समाधान का आश्वासन
धरना स्थल पर पहुंचे भाजपा नेता बन्नाराम मीना ने संघर्ष समिति और ग्रामीणों से बातचीत की। उन्होंने आश्वासन दिया कि सात दिनों के भीतर कृषि महाविद्यालय के मामले में समाधान का प्रयास किया जाएगा। साथ ही कहा कि यदि तय समय में कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, तो वे स्वयं आंदोलन में शामिल होंगे।
आश्वासन के बाद सात दिन के लिए स्थगित हुआ धरना
भाजपा नेता के आश्वासन के बाद माचाड़ी संघर्ष समिति ने धरने को सात दिनों के लिए स्थगित करने की घोषणा की। इसके साथ ही कस्बे में बाजार पुनः खोल दिए गए और स्थिति सामान्य हो गई।
2023 में स्वीकृत कॉलेज, राजनीतिक कारणों से हुआ स्थानांतरण—संघर्ष समिति
संघर्ष समिति से जुड़े विश्वेन्द्र सिंह ने बताया कि वर्ष 2023 में माचाड़ी के लिए कृषि महाविद्यालय स्वीकृत हुआ था, लेकिन बाद में इसे राजनीतिक दबाव के चलते रैणी के हातोज गांव में स्थानांतरित कर दिया गया। इस निर्णय से माचाड़ी क्षेत्र के लोगों में भारी असंतोष है।
पहले भी सौंपे जा चुके हैं ज्ञापन, अब बढ़ा आंदोलन
ग्रामीणों ने बताया कि इससे पहले भी मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री के नाम उपखंड अधिकारी को कई बार ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ। इसी वजह से आंदोलन को तेज करना पड़ा।