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लोकसभा में परंपरा टूटी: बिना पीएम के जवाब के पारित हुआ धन्यवाद प्रस्ताव

बजट सत्र 2026 के दौरान लोकसभा में एक असामान्य स्थिति देखने को मिली। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पारंपरिक जवाब के बिना ही सदन में पारित कर दिया गया। संसदीय परंपराओं के अनुसार आमतौर पर चर्चा का समापन प्रधानमंत्री के वक्तव्य से होता है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ, जिसे राजनीतिक हलकों में चौंकाने वाला माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री के संबोधन से पहले सदन में बढ़ा तनाव

सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री के निर्धारित भाषण से कुछ समय पहले ही लोकसभा का माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। सदन के भीतर शोर-शराबा और असहज स्थिति बनने लगी, जिसके चलते कार्यवाही को लेकर असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई।

सुरक्षा को लेकर हाई-अलर्ट, बढ़ाई गई सतर्कता

सदन में मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स का दावा है कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरती गई। भाजपा सांसदों की ओर से आशंका जताई गई कि विपक्षी दलों के कुछ सांसद आक्रामक रुख अपना सकते हैं, जिसके बाद सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई।

विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी तनातनी

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक तनाव साफ नजर आया। हालांकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना सामने नहीं आई, लेकिन बदले हालातों के बीच धन्यवाद प्रस्ताव को बिना प्रधानमंत्री के जवाब के ही पारित कर दिया गया।

संसदीय इतिहास में दुर्लभ माना जा रहा घटनाक्रम

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, लोकसभा में इस तरह का घटनाक्रम बेहद कम देखने को मिलता है। प्रधानमंत्री के बिना जवाब दिए चर्चा का समापन होना संसदीय इतिहास में एक दुर्लभ उदाहरण माना जा रहा है, जिस पर आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस तेज हो सकती है।

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