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लोकसभा में गर्मागर्मी: ‘वोट चोरी’ पर राहुल गांधी के चैलेंज को अमित शाह ने बताया राजनीतिक नैरेटिव

लोकसभा में आज सियासी तापमान उस वक्त चरम पर पहुंच गया, जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आमने-सामने हो गए। ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर खुली बहस की राहुल गांधी की चुनौती को अमित शाह ने सीधे तौर पर खारिज कर दिया। दोनों के बीच हुई यह तीखी नोकझोंक इलेक्टोरल रिफॉर्म की चर्चा के दौरान शुरू हुई और देखते-ही-देखते सदन का माहौल पूरी तरह गर्मा गया। आइए जानते हैं पूरा मामला…

इलेक्टोरल रिफॉर्म चर्चा के बीच राहुल-अमित शाह आमने-सामने

लोकसभा में 10 दिसंबर को इलेक्टोरल रिफॉर्म पर चर्चा शुरू हुई ही थी कि बहस अचानक राजनीतिक आरोपों और जवाबी हमलों में बदल गई। गृह मंत्री अमित शाह जब स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया समझा रहे थे, तभी विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बीच में हस्तक्षेप करते हुए सरकार पर ‘वोट चोरी’ का आरोप दोहराया और खुली बहस की चुनौती दे डाली। इस अचानक हुए टकराव ने सदन की शांत चल रही कार्यवाही को पूरी तरह गरमा दिया।

राहुल गांधी बोले—‘आप बहस से भाग रहे हैं’

अमित शाह के भाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि वह गृह मंत्री को चुनौती देते हैं कि वे उनकी हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस पर बहस करें। राहुल का इशारा उनकी उन प्रेस कॉन्फ्रेंस की ओर था, जिनमें उन्होंने भाजपा और चुनाव आयोग पर मिलकर ‘वोट चोरी’ करने की साजिश रचने का आरोप लगाया था। राहुल ने आरोप लगाया कि सरकार सीधा जवाब देने से बच रही है, इसलिए वे बहस को टालने की कोशिश कर रही है।

अमित शाह का पलटवार—‘हाइड्रोजन बम नहीं, सिर्फ राजनीतिक नैरेटिव’

राहुल गांधी की चुनौती पर अमित शाह ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी यह तय नहीं कर सकते कि वह सदन में क्या बोलें या किस विषय पर प्रतिक्रिया दें। शाह ने राहुल की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दावों को “हाइड्रोजन बम” नहीं, बल्कि “वोट चोरी का मनगढ़ंत नैरेटिव” बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष SIR का विरोध इसलिए कर रहा है क्योंकि यह प्रक्रिया कई राज्यों में तय वोट बैंक पर असर डाल सकती है।

हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही प्रभावित

राहुल गांधी और अमित शाह के बीच बढ़ते वाकयुद्ध को देखते हुए सदन में शोरगुल बढ़ गया। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही अपने-अपने नेताओं का समर्थन करते दिखे। इस नोकझोंक की वजह से इलेक्टोरल रिफॉर्म पर गंभीर चर्चा बार-बार बाधित होती रही। हंगामे की स्थिति ऐसे समय में बनी जब सरकार SIR को चुनावी पारदर्शिता का महत्वपूर्ण कदम बता रही थी, जबकि विपक्ष इसे सरकार के चुनावी हस्तक्षेप का तरीका करार दे रहा है।

राजनीतिक तापमान और बढ़ने के संकेत

इस बहस ने साफ संकेत दे दिए हैं कि आने वाले दिनों में ‘वोट चोरी’, SIR और चुनावी सुधारों का मुद्दा राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रहने वाला है। जहां भाजपा इसे पारदर्शिता की दिशा में सुधार मान रही है, वहीं कांग्रेस इसे चुनावी प्रक्रिया में दखल का प्रयास बता रही है। लोकसभा में हुई यह तीखी भिड़ंत आगामी राज्यों और लोकसभा चुनाव के संदर्भ में राजनीतिक माहौल को और गर्म कर सकती है।

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