कर्नाटक के डीजीपी के. रामचंद्र राव कौन हैं? वायरल वीडियो के बाद पुलिस विभाग पर उठे गंभीर सवाल….
बेंगलुरु। कर्नाटक पुलिस विभाग उस समय विवादों में घिर गया, जब नागरिक अधिकार प्रवर्तन निदेशालय के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) डॉ. के. रामचंद्र राव से जुड़ा एक कथित आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में उन्हें अपने कार्यालय परिसर में एक महिला के साथ कथित तौर पर अनुचित स्थिति में दिखाए जाने का दावा किया जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने तत्काल प्रभाव से डीजीपी को निलंबित कर दिया है।
वायरल वीडियो पर क्या बोले डीजीपी रामचंद्र राव?
विवाद बढ़ने के बाद डीजीपी के. रामचंद्र राव ने सामने आकर वीडियो को पूरी तरह झूठा और मनगढ़ंत बताया है। उन्होंने कहा कि उन्हें खुद नहीं पता कि वीडियो कब और कैसे रिकॉर्ड किया गया। राव के अनुसार, आज के डिजिटल दौर में किसी के खिलाफ कुछ भी तैयार किया जा सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि यदि वीडियो पुराना है, तो संभव है कि वह कई साल पहले का हो, जब वे बेलगावी में तैनात थे।
कौन हैं के. रामचंद्र राव?
डॉ. के. रामचंद्र राव 1993 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। वे वर्तमान में कर्नाटक के नागरिक अधिकार प्रवर्तन निदेशालय के प्रमुख के रूप में कार्यरत थे। इससे पहले वे कर्नाटक राज्य पुलिस आवास एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक भी रह चुके हैं। सितंबर 2023 में उन्हें डीजीपी के पद पर पदोन्नति मिली थी। अगस्त 2025 में प्रशासनिक कार्रवाई के बाद उनकी दोबारा बहाली हुई थी।
लंबे करियर में कई अहम पदों पर रहे
अपने करियर के दौरान रामचंद्र राव ने बेंगलुरु मेट्रोपॉलिटन टास्क फोर्स में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) और दक्षिणी रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IGP) जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। उन्हें शहरी पुलिसिंग और बड़े प्रोजेक्ट्स के प्रबंधन का अनुभव रखने वाला अधिकारी माना जाता है।
बेटी रान्या राव का मामला भी बना विवाद की वजह
रामचंद्र राव से जुड़ा एक बड़ा विवाद मार्च 2025 में सामने आया था, जब उनकी अभिनेत्री बेटी रान्या राव को बेंगलुरु अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया गया। आरोप है कि वह दुबई से भारी मात्रा में सोना लेकर भारत आई थीं। जांच एजेंसियों ने इस मामले में सरकारी प्रभाव और प्रोटोकॉल के दुरुपयोग को लेकर सवाल उठाए थे। रान्या राव फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
पहले भी विवादों में रहे हैं रामचंद्र राव
यह पहला मौका नहीं है जब के. रामचंद्र राव विवादों में आए हों। वर्ष 2014 में दक्षिणी रेंज के आईजीपी रहते हुए उनका नाम एक कथित नकदी जब्ती विवाद से जुड़ा था, जिसमें व्यापारियों ने पुलिस पर बड़ी रकम के दुरुपयोग के आरोप लगाए थे।
जांच के बाद होगा आगे का फैसला
फिलहाल राज्य सरकार द्वारा पूरे मामले की जांच की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि तथ्यों और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर पुलिस विभाग की छवि और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।