कानपुर लैम्बोर्गिनी केस में शिवम मिश्रा को 7 घंटे में जमानत..
तेज रफ्तार कार, 6 घायल… और कुछ ही घंटों में मिली बेल
कानपुर से एक बड़ा कानूनी मोड़ सामने आया है। वीआईपी रोड पर लैम्बोर्गिनी कार से छह लोगों को टक्कर मारने के आरोपी शिवम मिश्रा को गिरफ्तारी के महज सात घंटे के भीतर जमानत मिल गई। कोर्ट ने पुलिस की दलीलों पर सवाल उठाते हुए न्यायिक हिरासत की मांग खारिज कर दी, जिससे पूरे मामले ने नया तूल पकड़ लिया है।
कोर्ट में पुलिस से सख्त सवाल
पुलिस ने अदालत से 14 दिन की न्यायिक हिरासत की मांग की थी। लेकिन सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि जब पीड़ित पक्ष समझौता कर चुका है, तो न्यायिक हिरासत की जरूरत किस आधार पर है?
जांच अधिकारी इस सवाल का ठोस जवाब नहीं दे सके। इसी के चलते अदालत ने रिमांड अर्जी खारिज कर दी। कोर्ट ने यह भी पूछा कि गिरफ्तारी की आवश्यकता क्यों पड़ी। पुलिस का कहना था कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहा था।
आरोपी का पक्ष: “जांच में करूंगा पूरा सहयोग”
सुनवाई के दौरान शिवम मिश्रा ने अदालत को आश्वस्त किया कि वह जांच में पूरा सहयोग करेगा, किसी को धमकाएगा नहीं और साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करेगा। इसके बाद अदालत ने 20 हजार रुपये के बेल बॉन्ड पर उसे रिहा करने का आदेश दिया।
कानूनी जानकारों के मुताबिक, अदालत ने यह स्पष्ट संकेत दिया कि हिरासत तभी जरूरी है जब जांच में ठोस कारण सामने हों।
कैसे हुआ था हादसा?
यह घटना दोपहर करीब 3:15 बजे वीआईपी रोड स्थित रेव-3 के पास हुई। तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा का बेटा शिवम मिश्रा अपनी लग्जरी लैम्बोर्गिनी कार से तेज रफ्तार में जा रहा था। अचानक कार अनियंत्रित हो गई और सड़क किनारे खड़े लोगों व वाहनों को टक्कर मार दी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक बुलेट सवार को इतनी जोरदार टक्कर लगी कि वह कई फीट दूर जा गिरा। कार बुलेट के अगले पहिए पर चढ़ गई। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
पीड़ितों की आपबीती
घायल सोनू त्रिपाठी ने बताया कि वह अपने रिश्तेदार के साथ सड़क किनारे खड़े थे। तभी तेज रफ्तार कार ने पहले एक ऑटो को टक्कर मारी और फिर उनकी बुलेट को कुचल दिया। टक्कर इतनी तेज थी कि दो युवक हवा में उछलकर फुटपाथ पर जा गिरे।
सभी घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, जिनमें से एक युवक के चेहरे पर गंभीर चोट आई और खून बह रहा था।
कानून, प्रभाव और सवाल
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इतने गंभीर सड़क हादसे में आरोपी को इतनी जल्दी जमानत कैसे मिल गई। हालांकि अदालत ने कानूनी आधार पर निर्णय लिया, लेकिन पुलिस की तैयारी और दलीलों की कमजोरी चर्चा का विषय बन गई है।
यह घटना सड़क सुरक्षा, रफ्तार नियंत्रण और प्रभावशाली लोगों के मामलों में पुलिस की कार्रवाई पर बहस छेड़ सकती है। आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया तय करेगी कि इस केस की दिशा क्या होगी।