नाकाम दौर में जया ने थामा अमिताभ का हाथ, माता-पिता की एक शर्त से शुरू हुआ जिंदगी भर का साथ
बॉलीवुड की चमक-दमक भरी दुनिया में जहां रिश्ते अक्सर समय के साथ बदल जाते हैं, वहीं अमिताभ बच्चन और जया बच्चन की प्रेम कहानी आज भी मजबूत रिश्ते की मिसाल मानी जाती है। करीब पांच दशकों से ज्यादा समय से साथ रह रहा यह कपल प्यार, सम्मान और भरोसे की ऐसी कहानी पेश करता है, जिसने फैंस के दिलों में खास जगह बनाई है।
पहली मुलाकात से शुरू हुआ रिश्ता
1970 के शुरुआती दौर में जया भादुड़ी पहले से सफल अभिनेत्री थीं, जबकि अमिताभ बच्चन अपने करियर के संघर्ष के दौर में थे। दोनों की मुलाकात पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट से जुड़े माहौल में हुई और धीरे-धीरे दोस्ती गहरी होती गई।
बताया जाता है कि अमिताभ ने एक मैगजीन कवर पर जया की तस्वीर देखी थी, जिसके बाद उन्हें लगा कि यही उनकी आदर्श जीवनसाथी हो सकती हैं — संस्कारी भी और आधुनिक सोच वाली भी।
फिल्म ‘गुड्डी’ के दौरान दोनों को एक-दूसरे को करीब से समझने का मौका मिला। उस वक्त जब इंडस्ट्री अमिताभ को खास तवज्जो नहीं दे रही थी, जया को भरोसा था कि वे एक दिन बड़े स्टार बनेंगे। यही भरोसा आगे चलकर प्यार में बदल गया।
शादी की दिलचस्प कहानी
फिल्म ‘जंजीर’ की सफलता के बाद अमिताभ और जया दोस्तों के साथ लंदन घूमने जाना चाहते थे। लेकिन अमिताभ के माता-पिता ने साफ कहा कि बिना शादी के विदेश यात्रा ठीक नहीं।
इस शर्त के बाद अमिताभ ने तुरंत जया को शादी के लिए प्रपोज किया और उन्होंने भी बिना झिझक हां कह दी।
3 जून 1973 को सादगी भरे समारोह में दोनों शादी के बंधन में बंध गए।
करियर और परिवार के बीच संतुलन
शादी के बाद जया बच्चन ने परिवार को प्राथमिकता देते हुए फिल्मों से दूरी बनाई। अमिताभ कई बार मान चुके हैं कि जया का यह फैसला उनके करियर और परिवार की मजबूती का अहम आधार बना।
हालांकि समय-समय पर अमिताभ का नाम दूसरी अभिनेत्रियों से जुड़ा और उनके करियर में उतार-चढ़ाव भी आए, लेकिन दोनों ने हर परिस्थिति में एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ा।
रिश्ते से मिलने वाली सीख
अमिताभ-जया की कहानी यह बताती है कि मजबूत रिश्ता सिर्फ ग्लैमर या सफलता पर नहीं, बल्कि भरोसे, सम्मान और साथ निभाने की भावना पर टिकता है। यही वजह है कि यह जोड़ी आज भी बॉलीवुड के सबसे स्थायी और प्रेरणादायक कपल्स में गिनी जाती है।